नैना पिछले चार साल से लगातार राष्ट्रीय प्रतियोगिता में यूपी टीम का प्रतिनिधित्व कर रहीं हैं। उनके लिए शॉर्ट्स पहन कर हैंडबॉल खेलने की राह आसान नहीं थी। परिवार और समाज की बंदिशों के बावजूद दोनों ने मेडल जीतकर सबका मुंह बंद कर दिया। उन्हें जूते खरीदने के लिए पिता के काम में हाथ बंटाने के अलावा मजदूरी करनी पड़ती थी।
कोमल ने बताया कि वह गांव से साइकिल चलाकर 10 किलोमीटर दूर परमानंदपुर मैदान पर सुबह 6 बजे अभ्यास करने आती हैं। दोपहर में पढ़ाई करती हैं और शाम को वर्कआउट करने के बाद घर जाती हैं। उन्होंने बताया कि वह पिछले चार साल से हैंडबॉल टीम का हिस्सा हैं।