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चिंताजनक: तीन महीने में आए 56 एचआईवी संक्रमित, इनमें 15 छात्र; जानें- क्या है इसकी बड़ी वजह

Mon, 07 Jul 2025 05:13 PM IST
प्रगति चंद अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।

सार

Varanasi News: एचआईवी संक्रमितों की संख्या बढ़ती जा रही है। इनमें अधिकतर छात्र शामिल हैं। डॉक्टरों के अनुसार अधिकतर छात्र असुरक्षित यौन संबंध के चलते संक्रमित हुए तो वहीं कुछ युवा नशे की वजह से संक्रमित हुए। 
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एचआईवी संक्रमण का खतरा - फोटो : Adobe Stock
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विस्तार
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दीनदयाल अस्पताल परिसर स्थित एआरटी (एंटी रेट्रोवायरल थेरेपी) सेंटर में पिछले तीन महीने में 56 एचआईवी संक्रमित मरीज सामने आए हैं। इनमें 20 युवा है, इसमें भी 15 छात्र हैं, जो शहर के किसी न किसी विश्वविद्यालय से स्नातक कर रहे हैं। वहीं, कुछ छात्र नशे की चपेट में आकर सिरिज का इस्तेमाल कर एड्स से संक्रमित हो गए गए हैं।

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अस्पताल से जुड़े काउंसलर राजेश मिश्रा बताते हैं कि अप्रैल में 22, मई में 20 और जून में 14 मामले सामने आए हैं। एआरटी सेंटर में प्रतिदिन 80-100 मरीजों के एचआईवी की जांच और काउंसिलिंग की जा रही है। इनमें कुछ लोग खुद आ रहे हैं तो कुछ को डॉक्टर ही जांच लिख रहे हैं। इसके अलावा कुछ मरीजों को नाको (राष्ट्रीय एड्स नियंत्रण संगठन) के तहत काम कर रहे एनजीओ द्वारा लाया जाता है। अधिकतर एचआईवी संक्रमण का कारण असुरक्षित यौन संबंध है।

इसके अलावा कई मरीज संक्रमित सिरिंज से नशा करने के कारण इसका शिकार हुए हैं। चिकित्सकों के अनुसार, अधिकांश एचआईवी संक्रमित स्नातक कर रहे छात्र हैं या फिर बाहर से काम की तलाश में आए युवा हैं। जो गलत संगत या सोशल मीडिया के कारण एक दूसरे के प्रति आकर्षित हो रहे हैं। युवा वर्ग सोशल मीडिया के माध्यम से बनाए जा रहे कई ग्रुप्स में खुले तौर पर अंजान लोगों से मेलजोल और शारीरिक संबंध बना रहे हैं। जिसके कारण संक्रमण की आशंका और बढ़ जाती है।
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नशे की लत से संक्रमित हो रहे युवा 

दीनदयाल अस्पताल के ओएसडी सेंटर के मेडिकल ऑफिसर प्रशांत वैभव ने बताया कि नशे की लत के कारण भी युवा एचआईवी का शिकार हो रहे हैं। अस्पताल में एचआईवी की जांच करा रहे लोगों की काउंसलिंग करके उन्हें जागरूकता अभियान से जोड़कर ही इसे फैलने से रोका जा सकता है। 

लापरवाही ही एचआईवी का कारण
एड्स जागरूकता पर काम कर रहीं शालू पांडेय ने बताया कि यह रोग किसी भी व्यक्ति को हो सकता है। इससे अधिक घबराने की जरूरत नहीं है। जीवन में की गई लापरवाही इस रोग का कारण बनती है। इसलिए एचआईवी से वचने के लिए जागरूकता ही सबसे ज्यादा जरूरी होती है। कई बार लोग सामाजिक कलंक या डर के कारण इसकी जांच कराने से बचते हैं। जो कि भविष्य में उनके लिए खतरनाक साबित हो सकता है। 

क्या बोले अधिकारी
सेंटर पर आए लोगों की जांच के साथ उनकी काउंसलिंग की जा रही है। रिपोर्ट संक्रमित आने पर उन्हें दवाएं दी जा रही हैं। एचआईवी अव लाइलाज बीमारी नहीं है, वल्कि समय पर इलाज और दवा से इसे नियंत्रित किया जा सकता है। -डॉ. प्रीति अग्रवाल, चिकित्साधिकारी, एआरटी सेंटर, दीनदयाल अस्पताल

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