अविमुक्तेश्वर लिंग ही प्रथम महालिंग
श्री काशी विश्वनाथ द्वारा भगवान अविमुक्तेश्वर का स्वरूप देखकर ब्रह्मा और विष्णु आदि देवताओं व ऋषि मुनियों ने शिवलिंग स्थापित किए। इस क्षितिमंडल में यह अविमुक्तेश्वर लिंग ही प्रथम महालिंग कहा गया है। इसके बाद ही सारे शिवलिंग स्थापित हुए हैं।
आनंद कानन काशी ढूंढे की टीम ने छह महीने के अध्ययन के बाद अविमुक्तेश्वर महादेव की प्रमाणिकता पर अपनी मुहर लगाई है। अविमुक्तेश्वर महादेव का यह शिवलिंग श्री काशी विश्वनाथ धाम क्षेत्र से सटे खोवा गली में विराजमान है।
बीएचयू के प्रो. माधव जनार्दन रटाटे का कहना है कि यह ब्रह्मांड का प्रथम शिवलिंग है। जिसने अविमुक्तेश्वर के दर्शन किए और उन्हें स्पर्श किया, उसके सारे मनोरथ शीघ्र पूर्ण हो जाते हैं।
केंद्रीय ब्राह्मण महासभा के प्रदेश अध्यक्ष अजय शर्मा और मंगला गौरी के महंत नरेंद्र पांडेय ने बताया कि काशी खंड और पुराणों के अध्ययन के बाद अविमुक्तेश्वर महादेव के स्थान का पता चला है। काशी खंड में तो विस्तार से इसका वर्णन मिलता है।