1879 में गोविंद कलां में हुआ था आगा हश्र का जन्म
आगा हश्र का जन्म अप्रैल 1879 को दालमंडी के गोविंद कलां में हुआ था। उनके पिता आगा गनी शाह अपने मामा के बुलाने पर कश्मीर से बनारस आए थे। वे कश्मीर में शाॅल का व्यापार करते थे। यहां भी अपने मामा के साथ उन्होंने वही व्यापार शुरू किया। बाद में उनके मामा ने अपनी बेटी से उनकी शादी कर दी। कश्मीरी मूल के होने के कारण वे अपने नाम के आगे कश्मीरी लगाने लगे।
रामापुरा स्थित जयनारायण इंटर काॅलेज में पढ़ने के साथ-साथ शायरी और नाटक की ओर उनकी रुचि बढ़ गई। पढ़ने में उनका मन नहीं लगा तो मुंबई चले गए। नाटक लिखने में उनकी दिलचस्पी थी ही, उन्हें मौका भी मिल गया। वे एक नाटक कंपनी में काम करने लगे। जहां वे नाटक लिखते और उसका मंचन करवाते। दर्शकों ने उनके नाटकों को पसंद किया और उनकी ख्याति बढ़ने लगी। उनके नाटकों की लोकप्रियता इतनी बढ़ी कि दर्शक उन्हें उर्दू का शेक्सपीयर कहने लगे।
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आगा हश्र ने शेक्सपीयर के कुछ नाटकों का उर्दू में अनुवाद भी किया। शहीद-ए-नाज, सैद-ए-हवस, सफद-ए-खून, ख्वाब-ए-हस्ती, यहूदी की बेटी उनके महत्वपूर्ण नाटक हैं। उनका नाटक यहूदी की बेटी बहुत चर्चित हुआ। वर्ष 1958 में इस पर हिंदी में फिल्म भी बनी जिसमें दिलीप कुमार, मीना कुमारी और सोहराब मोदी ने अभिनय किया। उन्होंने रामायण और महाभारत की कथाओं पर आधारित नाटक भी लिखे। ये नाटक काफी सराहे गए। इन्होंने शेर और गजल भी खूब लिखे। कम उम्र में ही 1935 में उनका लाहौर में निधन हो गया।
साल 1879 में फारसी में लिखी गई नौ फीट सात इंच के कागज पर लिखी गई उनकी जन्मकुंडली सहेज कर रखी गई है। आगा कमाल बताते हैं कि यह कुंडली भारतीय ज्योतिषीय गणना के आधार पर मौलवी मोहम्मद जफ्फार ने बनाई थी। आगा कमल बताते हैं कि कुछ लोग उनके जन्म के समय को लेकर विवाद करते हैं लेकिन यह कुंडली उनके विवादों को विराम लगाती है। फारसी में लिखी इस कुंडली से स्पष्ट होता है कि उस समय बहुत से मौलवी संस्कृत सीखकर संस्कृत ग्रंथों का अध्ययन करते थे और भारतीय ज्योतिष के आधार पर तमाम गणनाएं करते हुए कुंडलियां बनाते थे।
कुछ खास बातें
- एमए और बीए (उर्दू) में उनके नाटक आज भी पढ़ाए जाते हैं।
- आगा हश्र के दूसरे चचेरे पाैत्र आगा कमाल बताते हैं कि इनके नाटक सिल्वर किंग और रुस्तम सोहराब को उर्दू के बीए और एमए के पाठ्यक्रम में शामिल किया गया है।