त्रिगुणात्मक सिद्धपीठ श्री महालक्ष्मी मंदिर में दर्शन के लिए उमड़े श्रद्धालु
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जीवित्पुत्रिका व्रत पितृपक्ष की अष्टमी तीन अक्तूबर को है। इस दिन महिलाएं निराजल व्रत रखेंगी। व्रत का पारण चार अक्तूबर को सुबह 7:28 बजे के बाद होगा। बताया कि सोरहिया दर्शन के समापन पर चार अक्तूबर को माता लक्ष्मी का शृंगार होगा।
उन्होंने बताया कि सोरहिया मेला के दौरान महिलाएं प्रतिदिन लक्ष्मी मंदिर और मंदिर के दक्षिण में स्थापित माता जिउतिया का पूजन करेंगी। कुंड में स्नान करने का विधान है। देवी को सोलह शृंगार की सामग्री अर्पित कर, 16 आचमन, देवी की 16 परिक्रमा, 16 चावल के दाने और 16 दूर्वा अर्पित कर कपड़े में बांधकर माता को रोज चढ़ाने की परंपरा है। 16 गांठ वाला धागा पहनकर पूजा करेंगी। वे जीवित वाहन की कथा का रोज श्रवण करेंगी। पुत्र की दीर्घायु और सुख-समृद्धि के लिए पूजन-अर्चन करेंगी।