Varanasi News: बैनियान ट्री संस्था की ओर से आयोजित संगीत संध्या की शुरुआत हल्की गुलाबी ठंड के बीच बनारस घराने के सधे कलाकार अंशुमान महाराज के सरोद वादन से हुई। उन्होंने राग गोरखा कल्याण में आलापचारी के बाद जोड़, झाला बजाया। रूपक व मध्यलय में तीनताल बंदिशों की धुन बजाई। तबले पर विभाष महाराज ने संगत की। अगली प्रस्तुति में प्रियांशु घोष ने स्वर साधे।
गंगातट पर आयोजित संगीतोत्सव ‘स्वरा’ के समापन पर कलाकारों ने सुर-साज से सुधिजनों संग मां गंगा को मगन किया। पं. शिव कुमार शर्मा के पुत्र पं. राहुल शर्मा की संतूर की तान के मुरीद हुए तो पं. उदय भावलकर व पं. प्रियांशु घोष के स्वरों की ताजगी ने आनंद की अनुभूति कराया।
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बैनियान ट्री संस्था की ओर से आयोजित संगीत संध्या की शुरुआत हल्की गुलाबी ठंड के बीच बनारस घराने के सधे कलाकार अंशुमान महाराज के सरोद वादन से हुई। उन्होंने राग गोरखा कल्याण में आलापचारी के बाद जोड़, झाला बजाया। रूपक व मध्यलय में तीनताल बंदिशों की धुन बजाई। तबले पर विभाष महाराज ने संगत की। अगली प्रस्तुति में प्रियांशु घोष ने स्वर साधे।
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उन्होंने दादरा की भी बंदिश पेश की। राग मारवा में बिलंबित एकताल में पिया मोरे अनत देस..., मध्यलय एकताल में सांझ भई ना... तथा द्रुत त्रिताल में साधे हो सुख को ध्यान...सुनाकर सुधिजनों को मदमस्त कर दिया। तबले पर सिद्धार्थ चक्रवर्ती, हारमोनियम पर हर्षित उपाध्याय तथा तानपुरा पर डालिया मुखर्जी ने संगत की।
तीसरी प्रस्तुति पं. उदय भावलकर की ध्रुपद गायन की रही। उन्होंने गायन की इस प्राचीन शैली से श्रोताओं को परिचित कराया तो उन्होंने देवाधिदेव भगवान शिव की आराधना की। राग पुरिया में पार्वती नमरू शिवाय..., शिव शिव शिव महाबली शिव... बाबा की महिमागान किया। अंत में पं. राहुल वर्मा ने पिता से मिली विरासत को आगे बढ़ाते हुए उन्होंने संतूर की बेजोड़ प्रस्तुति की। राग गावती में रूपकताल, मध्यलय व द्रुतलय तीनताल में संतूर को विस्तार देते हुए सभी को झुमाया।
श्रोताओं की उनके पिता की चर्चित धुन पहाड़ी बचाने की फरमाइश की। उन्होंने राग मिश्र के दादरा ताल में निबद्ध पहाड़ी धुन बजाकर मुग्धकर दिया। पं. रामकुमार मिश्र ने तबले पर संगत की। इस दौरान संस्था के प्रबंध निदेशक महेश बाबू ने पं. ऋत्विक सांन्याल एवं सुबह-ए-बनारस के संस्थापक रत्नेश वर्मा को सम्मानित किया। संचालन अंकिता खत्री ने किया।