बेटे की लंबी उम्र की कामना के वक्त मिली मौत की खबर
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जिस मां ने अपनी लाल की लंबी उम्र के लिए छठ व्रत और पूजा कर रही थी, उसका लाल उसके सामने ही काल के गाल में समा गया। घटना उत्तर प्रदेश के गाजीपुर जिले की है। हमर थाना क्षेत्र के शायर गांव में मां के साथ ननिहाल में छठ पूजा करने गए सुहवल गांव निवासी युवक की मौत हो गई। बेटे की मौत होते ही पूजा करने वाली मां चीख-पुकार करते हुए छठ मईया की दुहाई देने लगी। हादसे से गंगा घाट पर मौजूद श्रद्धालु गमगीन हो उठे। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया।
सुहवल निवासी राजेंद्र कुशवाहा (17) अपनी मां शकुंतला देवी और छोटे भाई के साथ सायर गांव में छठ मनाने के लिए गया था। पहला अर्घ्य देने के लिए मां मंगलवार की शाम अपने बेटों सहित कर्मनाशा नदी के घाट पर पहुंची थी। शाम को दोनों भाइयों ने सूर्यदेव को अर्घ्य दिया। इसके बाद सभी घर को लौट आए। उगते सूर्य को अर्घ्य देने के लिए भोर में परिवार के लोग गंगा घाट के लिए घर से निकले।
घाट पर वेदी पर कलश स्थापित करने के बाद पूजन-अर्चन शुरू करते हुए पुत्रों के दीर्घायु होने की कामना में लीन हो गई। सूर्योदय का समय करीब आते ही वह पूजा का सूप लेकर गंगा में पहुंची और सूर्यदेव की अराधना करने लगी। इसी बीच छोटा बेटा वहां पहुंचा और अर्घ्य दिया। मां ने उससे पूछा कि बड़ा भाई राजेंद्र कहां है?
इसी बीच मौजूद लोग इस बात का शोर मचाने लगे एक लड़का नहाते समय डूब गया है। तभी मां भी वहां पहुंच गई। वहां मौजूद नाविक और ग्रामीणों ने जाल डालकर डूबे युवक को पानी से बाहर निकाला, लेकिन तब तक उसकी मौत हो चुकी थी। मृत बेटे पर नजर पड़ते ही मां शंकुतला चीत्कार उठी।
वहां मौजूद श्रद्धालु उसे सांत्वना देने में जुट गए। घाट का उत्साह और शोर-शराबा पूरी तरह से थम गया। सूचना मिलते ही मृतक के परिवार के लोग भी वहां पहुंचे। जानकारी होने पर मौके पर पहुंची पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया।
...और बढ़ गई लोगों के दिल की धड़कने
बुधवार की भोर में गहमर का कर्मनाशा घाट छठ पूजा की वजह से आस्था में नहा रहा था। यहां पहुंचे सैकड़ों परिवार के लोग सूर्यदेव के पूजन-अर्चन में लीन थे। व्रती महिलाओं के पूजा के सूप पर उनके पुत्र सहित परिवार के अन्य सदस्य सूर्यदेव को अर्घ्य दे रहे थे। इसी दौरान जैसे ही वहां इस बात का शोर उठा कि एक लड़का डूब गया है, हजारों लोगों की दिल की धड़कनें घबराहट के बीच बढ़ गई।
सभी अपने बच्चों सहित वहां आए परिवार के सदस्यों की तरफ नजर दौड़ाने लगे। जिनके बच्चे या परिवार के सदस्य नहीं थे, उनकी सांसे इस आशंका से ऊपर-नीचे होने लगी, कहीं उनके परिवार का कोई सदस्य नहीं डूब गया है। सभी की नजर नदी पर टिक गई। इसी बीच जैसे ही नाविकों ने लड़के के शव को बाहर निकाला, लोग उसकी पहचान करने में जुट गए।
इसी दौरान लोगों के भीड़ा के बीच धक्का-मुक्की करते हुए शकुंतला भी वहां पहुंची, मृतक बेटे पर नजर पड़ते ही वह बदहवास होकर चीख-पुकार करने लगी। सैकड़ों की भीड़ गम में डूबते हुए पूरी तरह से खामोश हो गई। आंखों में दुर्घटना का दर्द लिए हर कोई बिलख रही मां को ढांढस बंधाने में जुट गया।
हमसे का गलती हो गईल छठी मईया...
ऊपर वाले भी कभी-कभी ऐसी लीला करते हैं कि लोग सोचने को विवश हो जाते हैं। कुछ ऐसा ही लीला किया बुधवार को छठ पूजा के दौरान। जिस मां ने अपनी लाल की लंबी उम्र के लिए छठ व्रत और पूजा कर रही थी, उसका लाल गंगा स्नान के दौरान काल के गाल में समा गया।
मां शकुंतला के आंखों के आंसू थमने का नाम नहीं ले रहे थे। वह बार-बार बिलखते हुए यह कह रही थी कि हमसे कऊन अईसन गलती हो गईल छठी मईया कि हमरे ललवा के हमसे छीन लेहलू। उसकी इस व्यथा को सुन वहां मौजूद लोगों की आंखे भी छलछला जा रही थी।