गंगा में मूर्ति विसर्जन के सवाल पर अड़ी पूजा समितियों और साधु-संतों के रुख को देखते हुए प्रशासन बीच का रास्ता निकालने की हर कोशिश में जुट गया है। इसके लिए प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड आगे किया जाएगा। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड इस मसले पर जल्द ही काशी विद्वत परिषद की सलाह ले सकता है। शास्त्रोक्त समाधान निकालने की दिशा में बोर्ड के अफसरों ने पहल भी शुरू कर दी है। कहा जा रहा है कि ऐसा रास्ता निकाला जाएगा, जिस पर संत और काशी की जनता दोनों सहमत होंगे।
विसर्जन पर शास्त्रोक्त समाधान हासिल करने और बीच का रास्ता निकालने का जिम्मा प्रशासन ने प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को सौंप दिया है। प्रशासन भी अब स्वीकर करने लगा है कि काशी की स्थिति सूबे के दूसरे जिलों से भिन्न है। ऐसे में यहां की धार्मिक भावना और परंपरा को समझने की कोशिशें शुरू कर दी गई हैं। प्रशासन चाहता है कि हाईकोर्ट के आदेश का अनुपालन भी हो जाए और संतों-भक्तों की भावना भी प्रभावित न होने पाए। इसके लिए प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी डॉ. मोहम्मद सिकंदर को जिम्मेदारी सौंपी गई है। इसके साथ ही बोर्ड के अफसर काशी विद्वत परिषद के अलावा अन्य विद्वानों से रायशुमारी कराने की तैयारी में हैं। विद्वानों की सूची तैयार कराई जा रही है। विद्वत परिषद के अध्यक्ष प्रो. रामयत्न शुक्ल, प्रो. वशिष्ठ त्रिपाठी, काशी विश्वनाथ मंदिर न्यास परिषद के अध्यक्ष आचार्य अशोक द्विवेदी, काशी विद्वत परिषद न्यास के अध्यक्ष श्रीप्रकाश मिश्र, अखिल भारतीय काशी विद्वत परिषद के अध्यक्ष कामेश्वर उपाध्याय से बोर्ड के अधिकारी संपर्क साध रहे हैं। बोर्ड के अफसर टीएन सिंह ने सर्वमान्य हल निकालने के लिए काशी विद्वत परिषद की राय लेने के संकेत दिए।