सीवर के गिर रहे पानी से होकर जातीं महिलाएं।।
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इन घाटों पर ज्यादा दिक्कत
त्रिपुरा भैरवी, ललिता घाट, चेतसिंह, निषादराज, नगवां, सिंधिया घाट, संकठा घाट, रामघाट पर चैंबर से ओवरफ्लो होकर सीवेज बह रहा है। इन 84 घाटों पर कई आश्रम हैं।
इनमें प्रमुख रूप से देवरहा बाबा आश्रम, रामजानकी मठ, श्री विद्यामठ, स्यादवाद महाविद्यालय, पंचदशनाम जूना अखाड़ा, तुलसीघाट, लाली बाबा आश्रम, सतुआ बाबा आश्रम, श्रीमठ, बालाजी मंदिर हैं। इनके अलावा करीब 35 से अधिक होटल, गेस्ट हाउस, स्टे होम, रेस्टोरेंट घाट किनारे हैं। जिनका सीवर घाट पर बिछाई गई सीवर लाइन से कनेक्ट है। ये लाइनें क्षतिग्रस्त होने से इनका सीवर पाइप लाइन से बहकर घाटों से होकर गंगा में जा रहा है।
गंगा सफाई अभियान के बाद भी नहीं सुधरे हालात : गंगा सफाई के लिए चलाए जा रहे अभियान के बाद भी हालात नहीं सुधरे हैं। 8 एसटीपी भी गंगा में गिर रहे सीवर को पूरी तरह से रोकने में नाकाम है। हालात ये हैं कि वाराणसी में 432 एमएलडी सीवरेज को भले ही शोधित करके गंगा में भेजा जा रहा है। जबकि 532 एमएलडी सीवर निकल रहा है। अब भी 100 एमएलडी सीवर सीधे गंगा में जा रहा है।
सीवर के गिर रहे पानी से होकर जाते लोग।
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अस्सी और वरुणा से भी जा रहा सीवर
अस्सी और वरुणा से भी सीवर जा रहा है। जल निगम के अनुसार गंगा में नालों के जरिये जो सीवर जा रहा है वह टेंपरेरी ट्रीटमेंट सिस्टम के जरिये जा रहा है। इसके अलावा पंपिंग स्टेशनों पर बाईपास के लिए बनी पाइपों से जो पानी गिर रहा है वह बारिश के समय गिरता है। जल निगम उसे नाले का सीवर नहीं बल्कि बारिश का पानी मानता है।
बोले अधिकारी
बाढ़ के दौरान पांच पंपिंग स्टेशन बंद थे। बाढ़ का पानी उतरने के बाद पाइप लाइन और पंपिंग स्टेशन में सिल्ट जमा है। जिसे हटाने का काम जारी है। आज रात तक सभी पंप चालू हो जाएंगे। इससे गंगा में सीवर नहीं जाएगा। इसके लिए नौ टीमें लगाकर गंगा घाटों पर सीवर की समस्या दूर कराई जा रही है। छठ पूजा वाले दिन किसी प्रकार की समस्या नहीं आएगी। - कमल कुमार सिंह, अधिशासी अभियंता जल निगम
घाट पर अभी तक नहीं हटी मिट्टी की शिल्ट, चल रहा काम।
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