रविवार की सुबह ही एनडीआरएफ की टीम ने बैतरा नाले से पैैना नाले और उसके आसपास की पहाड़ियों पर महिला की तलाश की। कहीं सुराग न मिलने पर टीम सोन नदी में उतरी। इस दौरान कोन पुलिस के साथ परिजन और ग्रामीण भी मौजूद रहे।
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ओलावृष्टि और नाले में तेज बहाव के कारण मौत के आगोश में समाए महिलाओं और बच्चों के शव शनिवार की देर रात गांव पहुंचे। रविवार को गांव के बाहर घाट पर उनका अंतिम संस्कार हुआ। पूरा गांव शोक में था। पोस्टमार्टम के बाद गांव में शवों का पहुंचना देर रात से ही शुरू हो गया। पांचों शवों को उनके घरों में लाया गया।
गढ़वान गांव निवासी रमेश की पत्नी रीना, उसकी बेटी राजमति व भांजे विमलेश, के अलावा राजकुमारी व हीरावती का शव पहुंचा था। वहीं शुक्रवार की रात ही ओलावृष्टि से जान गंवाने वाली यशोदिया देवी का बैजनाथ गांव में पहुंचा। पूरे गांव की महिलाएं, पुरुष यहां शोक जताने को मौजूद रहे। बच्चों और महिलाओं के करुण क्रंदन से आसपास गम का माहौल रहा।