गोस्वामी तुलसीदास ने हनुमान चालीसा को घर-घर पहुंचाया। ऐसा कोई विषय नहीं है जिसे आप घर-घर नहीं पहुंचा सकते हैं। अगर आप घर-घर नहीं पहुंचा सकते हैं तो हम लोगों में भी कमी है। ज्योतिष का ज्ञान विज्ञान जन जन तक पहुंचना चाहिए। उससे लाभ होता है। जब आपकी सही बात नहीं पहुंचेगी तो गलत बातें लोगों तक पहुंच जाएंगी।
यह केवल संस्कृत की विद्या नहीं है आम जन की विद्या है। आम जन तक इसका सरलीकरण करके कैसे पहुंचाया जाए इस पर विचार होना चाहिए। काशी ज्ञान की नगरी है और यहां से पहल होनी चाहिए। काशी के विद्वान पुस्तकों के द्वारा और सोशल मीडिया के माध्यम से इस ज्ञान को जन-जन तक पहुंचाने के लिए पहल करें तो हम सभी इसमें सहयोग करेंगे।
एआई के बाद भी सशक्त बना हुआ है भारतीय ज्योतिष
उद्घाटन करते हुए संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. बिहारीलाल शर्मा ने कहा भारतीय ज्योतिष केवल भविष्य बताने की कला नहीं, बल्कि यह मानव जीवन को दिशा देने वाला विज्ञान है, जो ग्रहों, नक्षत्रों और ऊर्जा के सामंजस्य से जुड़ा है। प्रो. शर्मा ने कहा कि भारत सदियों से ज्ञान-विज्ञान की भूमि रहा है और ज्योतिष वह साधना है जिसने मानव, ग्रह और काल के रहस्यों को जोड़ा। आज जब कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) का युग तेजी से फैल रहा है, तब भी भारतीय ज्योतिष अपनी मानवीय संवेदना और आत्मिक दृष्टि के कारण विशिष्ट और सशक्त बना हुआ है।
मनुष्य के कर्म और मन की गति का प्रतिबिंब होती है ग्रहों की स्थिति
बीएचयू के ज्योतिष विभाग के प्रो. विनय कुमार पांडेय ने कहा कि ज्योतिष केवल गणना नहीं, बल्कि भावनाओं, कर्मों और चेतना को समझने का विज्ञान है। असली फलादेश तभी संभव है जब विद्वान अपनी गणना को प्रामाणिक सिद्धांतों के आधार पर करें। ग्रहों की स्थिति सिर्फ गणित नहीं, मनुष्य के कर्म और मन की गति का प्रतिबिंब होती है।
ज्योतिषविद प्रो. कामेश्वर उपाध्याय ने कहा ज्योतिष के माध्यम से न केवल व्यक्ति का भाग्य, बल्कि समाज और राष्ट्र की दिशा भी देखी जा सकती है। ज्योतिष विज्ञान समिति के अध्यक्ष डॉ. नागेंद्र पांडेय ने कहा कि ज्योतिष केवल गणना नहीं, बल्कि मनुष्य की चेतना, भावनाओं और परिवेश को समझने की साधना है।
मुख्य विकास अधिकारी हिमांशु नागपाल ने विज्ञान और अध्यात्म के मिलन को चेतना का नया क्षितिज बताया। उन्होंने कहा कि जब ज्योतिष विज्ञान और अध्यात्म एक-दूसरे से मिलते हैं, तो यह केवल गणना या तकनीकी प्रयोग नहीं रह जाता, बल्कि आत्मा की खोज का माध्यम बन जाता है। धन्यवाद ज्ञापन करते हुए प्रो. चंद्रमौलि उपाध्याय ने कहा कि ज्योतिष गणना से आगे बढ़कर जीवन के भावनात्मक और कर्मप्रधान पक्ष को भी पढ़ता है। यह मनुष्य के भीतर झांकने वाला विज्ञान है। इस दौरान विजय विनीत, अनंत चंद्र पांडेय, प्रो. सदानंद शुक्ल, दिलीप कुमार श्रीवास्तव मौजूद रहे।