जगद्गुरु डॉ. रामकमलाचार्य वेदांती महाराज ने कहा कि दुर्लभ मानव जीवन प्राप्त करके मनुष्य को व्यर्थ के व्यसनों का त्याग कर संयमपूर्वक जीवन जीना चाहिए। श्रीराम कथा मनुष्य के अंदर प्रविष्ट भेदभाव की भावना को नष्ट करने की प्रेरणा देती है। मनुष्य को जाति के आधार पर बांटना, ऊंच-नीच का भेद करना न तो जाति के लिए अच्छा है और न ही देश के हित में है।
वह बृहस्पतिवार को श्रीराम मंदिर गुरुधाम में आयोजित जगद्गुरु रामानंदाचार्य के 726 वें जयंती महोत्सव में श्रीराम कथा सुना रहे थे। डॉ. वेदांती महाराज ने कहा कि भगवान राम सभी प्राणियों के हृदय में समान रूप से निवास करते हैं। इसलिए भेदभाव रहित होकर न केवल मनुष्यों में अपितु समस्त प्राणियों में विद्यमान ईश्वर का दर्शन करते हुए सभी का सम्मान करना चाहिए। लोगों को भगवान राम के पावन चरित्र से प्रेरणा लेकर अपने जीवन को सरस, सुंदर व परस्पर प्रेम का विस्तार करने वाला बनाना चाहिए। उन्होंने श्रीराम कथा के अरण्यकांड का वर्णन किया। शाम को जगद्गुरु रामानंदाचार्य के व्यक्तित्व व कृतित्व पर संस्कृत, हिंदी व अंग्रेजी में संभाषण प्रतियोगिता हुई। इस अवसर पर नम्रता, कृष्ण बहादुर सिंह,रमेश, हरिशरण सिंह, बेबी प्रजापति उपस्थित रहे।
जगद्गुरु डॉ. वेदांती महाराज ने बताया कि जगद्गुरु रामानंदाचार्य की जयंती पर विशाल शोभायात्रा अस्सी घाट से निकलकर श्रीराम मंदिर पहुंचेगी। शोभायात्रा 10 जनवरी को सुबह 9 बजे अस्सी घाट से प्रारंभ होकर रविदास गेट, दुर्गाकुंड, कबीर नगर, खोजवां व कश्मीरीगंज होते हुए श्रीराम मंदिर पहुंचेगी।