इस बार उदया तिथि और रोहिणी नक्षत्र की अष्टमी एक ही दिन होने से दुर्लभ संयोग बना है। इससे जयंती नामाष्टमी योग बन रहा है। विशिष्ट योग में गृहस्थ और वैष्णव दोनों कान्हा का जन्मोत्सव मनाएंगे। मंदिरों, मठों, आश्रमों और घरों में भगवान श्रीकृष्ण के जन्म का उल्लास रहेगा। मध्यरात्रि में प्रभु के जन्म के साथ ही उत्सव शुरू हो जाएगा। प्रभु के जन्मोत्सव पर व्रत रखकर पूजा करने से पुण्य, सिद्धियों की प्राप्ति और मनोकामनाएं पूर्ण होंगी।
ज्योतिषविदों के अनुसार, रोहिणी नक्षत्र बृहस्पतिवार की रात 12:43 बजे से अगले दिन उदया तिथि में शुक्रवार की रात 11:12 बजे तक है। जबकि भाद्रपद कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि बृहस्पतिवार की रात 1:33 बजे से शुक्रवार की रात 11:13 बजे तक रहेगी। रोहिणी नक्षत्र, अष्टमी तिथि तथा औदायिक रोहिणी तीनों के मिलने से वैष्णव और गृहस्थ एक साथ श्रीकृष्ण जन्माष्टमी मनाएंगे।