अंतरराष्ट्रीय ध्रुपद मेले के तीसरे दिन सोमवार को देश के विभिन्न प्रांतों से आए कलाकारों ने प्रस्तुति दी। तुलसी घाट पर आयोजित मेले में ध्रुपद सुनने के लिए गंगा तट पर रातभर श्रोता पंडाल में जमे रहे।
कार्यक्रम की तीसरी निशा की पहली प्रस्तुति डॉ. मधुच्छंदा के गायन, आज रंग लागी... ने श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। उन्होंने छायानट में सूलताल में निबद्ध दुर्गा स्तुति से गायन को विराम दिया। इनके साथ पखावज पर आदित्य शर्मा ने संगत की। दूसरा प्रस्तुति सनीश ग्यावली की रही। उन्होंने बांसुरी के सुर से श्रोताओं को भाव विभोर कर दिया। वादन की शुरुआत राग जोग में किया। आलाप जोड़ झाला की प्रस्तुति को श्रोताओं ने करतल ध्वनि से सराहना की। पखावज पर आदित्य शर्मा ने प्रस्तुति की। इसके बाद ध्रुपद के ख्यातिलब्ध कलाकार प्रेम कुमार मलिक ने राग विहाग में आलाप जोड़ के पश्चात चौताल में बंदिश प्रस्तुत की। समापन राग शिवरंजनी में सूलताल से किया। पखावज पर पेशे से चिकित्सक डॉ. अनिल चौधरी ने संगत की। राजस्थान के जयपुर से पधारी मधुभट्ट तैलंग ने राग जोग में आलाप और जोड़ झाला प्रस्तुत किया। उन्होंने धमार से गायन का समापन किया।