षटतिला एकादशी को भगवान विष्णु की पूजा होती है और शुक्रवार को माता लक्ष्मी की पूजा करते हैं। इस बार षटतिला एकादशी पर भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की साथ पूजा करने का शुभ संयोग बना है।
षटतिला एकादशी व्रत में मन की शुद्धि के साथ ही आरोग्य का भी इंतजाम है। माघ कृष्ण पक्ष की एकादशी को मनाया जाने वाला यह पर्व शुक्रवार को है। भगवान श्री हरि को समर्पित पर्व के विधान 28 जनवरी को पूर्ण किए जाएंगे। ज्योतिष आचार्य पं. विमल जैन ने बताया कि एकादशी तिथि बृहस्पतिवार को रात 10.29 बजे लग रही है जो शुक्रवार को रात 8.28 बजे तक रहेगी।
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सुबह दैनिक कार्यों से निवृत्त होकर गंगा स्नान करना चाहिए। आराध्य की पूजा कर व्रत का संकल्प लेना चाहिए। ओम् श्री विष्णवे नम: व ओम नमो भगवते वासुदेव का अधिक से अधिक संख्या में जप करना चाहिए। साथ ही विष्णु सहस्त्रनाम, श्री विष्णु चालीसा, श्री पुरुष सूक्त और श्री हरि विष्णु से संबंधित पाठ करने चाहिए।
षडतिला एकादशी पर तिल के जल में डालकर स्नान, तिल के उबटन का लेपन, तिल युक्त जल का पान, रात में तिल युक्त लड्डू का सेवन, तिल दान और तिल से हवन किया जाता है।