भक्तों को पूजन संकल्प के लिए कुल 48 मिनट की यह श्रेष्ठ अवधि मिलेगी। जो श्रद्धालु पूरे नवरात्र व्रत रखकर मां भगवती की उपासना करते हैं, वे इसी पावन मुहूर्त में घट स्थापित कर अनुष्ठान प्रारंभ करें। इसके अलावा 20 अक्तूबर को सुबह 10 बजे के बाद नवरात्र का पारणा होगा।
सुभाष पांडेय के मुताबिक, 18 अक्तूबर को पूरे दिन अष्टमी और 19 की सुबह 7:53 बजे तक अष्टमी का प्रभाव रहेगा। इसी कारण 19 अक्तूबर को पड़ने वाली नवमी 20 की सुबह 9.29 बजे तक रहेगी। इसी कारण नवरात्र इस बार 10 कैलेंडर दिनों का होगा।
हाथी पर हो रहा मां का आगमन
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, रविवार को नवरात्र प्रारंभ होने से मां दुर्गा का आगमन गज (हाथी) पर हो रहा है, जबकि उनका प्रस्थान चरणायुध (मुर्गे) पर होगा। शास्त्रों में देवी के हाथी पर आने को अतिवृष्टि और भारी वर्षा का संकेत माना गया है। वहीं, मुर्गे पर गमन जनमानस में व्याकुलता, अशांति और उद्विग्नता का योग बनाता है। काशी के पुरोहितों के अनुसार, विधि-विधान से मां दुर्गा की साधना करने से नकारात्मक प्रभाव दूर होकर सुख-समृद्धि का मार्ग प्रशस्त होता है।
कब-कब 10 दिनों तक मनाई गई नवरात्रि
- वर्ष 2025 (शारदीय नवरात्र): 22 सितंबर से 1 अक्तूबर 2025 तक। इस वर्ष चतुर्थी तिथि की वृद्धि होने के कारण पूजन पूरे 10 दिनों तक चला।
- वर्ष 2016 (शारदीय नवरात्र): 1 अक्तूबर से 10 अक्तूबर 2016 तक। इस दौरान प्रतिपदा तिथि दो दिन पड़ने के कारण नवरात्रि 10 दिनों की हुई थी और 11वें दिन विजयादशमी मनाई गई थी।
- वर्ष 2000 (शारदीय नवरात्र): 28 सितंबर से 7 अक्तूबर 2000 तक। इस वर्ष भी तिथि वृद्धि के कारण यह पर्व 10 दिनों तक मनाया गया था।
- वर्ष 1998: इस वर्ष भी पंचांग गणना के अनुसार शारदीय नवरात्र में एक तिथि की वृद्धि होने से 10 दिनों का पर्व पड़ा था।
- वर्ष 1982: शारदीय नवरात्र के दौरान तिथि विस्तार के कारण 10 दिनों की पूजा का संयोग बना था।