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पौधों में उकेरी देवताओं की आकृति, पशु-पक्षी और धार्मिक प्रतीक भी, सबका मन मोह लेती है यह बगिया

Thu, 17 Dec 2020 10:00 AM IST
गीतार्जुन गौतम अमर उजाला नेटवर्क, जौनपुर
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बगिया में खड़े रामबचन बिंद। - फोटो : अमर उजाला
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ऐसा बाग अपने आसपास आपने शायद ही देखा होगा, जिसमें पौधे पशु-पक्षी और देवताओं के रूप में हो। एक तरफ दहाड़ लगाते शेर की छवि तो दूसरी ओर भगवान शिव और बजरंग बली का रूप। त्रिशुल, स्वास्तिक, अशोक स्तंभ जैसे प्रतीक वाले आकार में भी पौधे इस बाग में दिख जाएंगे।

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अपने आप में अनूठे इस बाग को निहारने और ताजी हवा की चाह में लोग जौनपुर जिले के धर्मापुर ब्लॉक के इमलो पांडेय गांव अक्सर आते हैं। रामबचन बिंद की अद्भुत बागवानी देख सराहना किए बिना नहीं जाते।


महज 12 वर्ष की उम्र में ही रामबचन की पौधों से यारी हो गई थी। हाईस्कूल की पढ़ाई पूरी करने के बाद वह पर्यावरण संरक्षण का पैगाम लोगों तक पहुंचाने में जुट गए। इमलो पांडेय गांव में करीब 15 विश्वा भूमि में अनोखी बगिया विकसित कर वह लोगों की वाहवाही बटोर रहे हैं।

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इस बगीचे में घुसते ही जंगल के राजा शेर की दहाड़ती आकृति दिखती है। बगल में दो मोर नाचते हुए भी नजर आएंगे। बगीचे में राम बचन बिंद ने कामिनी के पेड़ से भगवान शिव, बजरंग बली, शेर, मोर, त्रिशूल, शिवलिंग, गिद्ध, स्वास्तिक, अशोक स्तंभ जैसी आकृतियां बनाई हैं, जो मन मोहते हैं। बगीचे में आड़ू, फलीदा, चीकू, मुसम्मी, संतरा, अनार, लीची, सफेद जामुन, चेरी, नाशपाती, जापानी अमरूद के भी पेड़ हैं।

जापानी अमरूद का एक फल एक किलो तक होता है। बगिया में अश्वगंधा, काली मूसली, पीपल, धंवर बरुआ, चंदन, लाल चंदन, सफेद चंदन व निर्गुड़ी जैसे औषधीय वृक्षों का भी संग्रह है। रुद्राक्ष, कल्प वृक्ष, कपूर, लवंग इलायची, हींग व लोहबान भी है, जिन्हें देख बगीचे में पहुंचने वाले आह्लादित होते हैं।
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खास बात यह है कि राम बचन बिंद ने बिना किसी सरकारी मदद के ही अपनी निजी भूमि में फलदार, औषधीय और सजावटी पौधे लगाकर इसे आकर्षक का केंद्र बनाने का सुंदर प्रयास किया है। वह पड़ोस के सम्मोपुर, मोहम्मदपुर कांध, रत्तीपुर, रायपुर, कादीपुर, सरैयां, उत्तरगावां, किरतापुर व कबिरुद्दीनपुर आदि गांवों में हजारों आम, नीम, बरगद और पीपल के वृक्ष लगाकर पर्यावरण संरक्षण का भी संदेश दे रहे हैं।

बागवानी को ही उन्होंने अपना जीवन बना लिया है और यही उनकी आजीविका का जरिया भी है। इस समय रामबचन बिंद ने एक हजार पौधों के नर्सरी तैयार कर रखी है। वर्ष 2000 से इस कार्य में लगे रामबचन अब तक दस हजार पौधे लगा चुके हैं। पेड़ पौधों से लगाव के बारे में उन्होंने बताया कि पृथ्वी व मानव को वृक्षों की कितनी आवश्यकता है, इसका सच भलीभांति जान चुका हूं। प्रकृति से लगाव में जितना आनंद की अनुभूति होती है उतना किसी अन्य कार्य में नहीं होता है।
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