शंकराचार्य ने रामचरित मानस के बालकांड की चौपाई उघरहिं अंत न होइ निबाहू। कालनेमि जिमि रावन राहू का जिक्र करते हुए कहा कि यह बताती है कि कपट या ढोंग का अंत निश्चित है। पाखंडी का भेष (वेश) ज्यादा दिनों तक नहीं चलता और अंत में सच्चाई सामने आ ही जाती है, जैसे कालनेमि, रावण और राहु के कपट का अंत हुआ था। झूठ बोलने वालों की कलही भी ऐसे ही खुलेगी।
शंकराचार्य ने एक सवाल के जवाब में व्यंग्य करते हुए कहा कि क्या ये देश प्रधानमंत्री, राष्ट्रपति का नहीं है, उन्हें नहीं पता कि उनके देश का शंकराचार्य दुराचारी हो गया। दूसरा प्रश्न यह कि शंकराचार्य जैसे निष्कलंक व्यक्ति पर कहानी बनाकर यह सब बातें कहना, क्या यह वह समझ नहीं रहे हैं।