शंकराचार्य ने कहा कि सनातन धर्म के शास्त्र राजा को गो, ब्राह्मण और देवायतन की रक्षा के लिए कटिबद्ध बताते हैं। भगवान राम ने भी विश्वामित्र के समक्ष प्रतिज्ञा की कि गो, ब्राह्मण व राष्ट्रहित के लिए जो कहा जाए, वह पूर्ण करेंगे। इसी मार्ग पर चलते हुए शिवाजी महाराज के पुत्र संभाजी महाराज ने बुधभूषण ग्रंथ में लिखा कि जो क्षत्रिय गाय, ब्राह्मण और मंदिरों की रक्षा के लिए प्राण देता है, वह स्वर्ग का अधिकारी होता है और उसकी कीर्ति अनंत काल तक प्रतिष्ठित रहती है।
शंकराचार्य ने कहा कि वर्तमान में हमारे बीच ऐसे लोग हैं जो गाय, ब्राह्मण और मंदिरों को नष्ट करने का प्रयास कर रहे हैं, उनसे धर्मयुद्ध लड़कर छद्म हिंदुओं को पहचानने का समय आ गया है। इसी का आरंभ वे आज से कर रहे हैं। घाट पर कलाकारों ने शिवाजी महाराज के जीवन पर आधारित लघु नाटिका की भावपूर्ण प्रस्तुति दी।
शंकराचार्य को करपात्र गोभक्त सम्मान
अखिल भारतीय सारस्वत परिषद की ओर से शंकराचार्य को गोरक्षा के लिए किए जा रहे प्रयासों के प्रतिफल स्वरूप करपात्र गोभक्त सम्मान से सम्मानित किया गया। संस्था के गिरीश चंद्र तिवारी एवं प्रो. विवेकानंद तिवारी ने यह पहला सम्मान शंकराचार्य को प्रदान किया।