नेहरू ग्राम भारती विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. राममोहन पाठक ने कहा कि रसलीन जैसे रीति काल के गुमनाम कवि पर कार्य कर डॉ. शैल कुमारी ने हिंदी की अभूतपूर्व सेवा की है। हिंदी जगत इस कार्य के लिए ऋणी रहेगा। वह बृहस्पतिवार को डॉ. विश्वनाथ प्रसाद कीर्ति बोध संस्थान द्वारा महिला लेखिका डॉ. शैल कुमारी की पुण्य तिथि पर ऑनलाइन कार्यक्रम में विचार प्रकट कर रहे थे।
कार्यक्रम में सुधांशु उपाध्याय को डॉ. शैल नवगीत शिखर, डॉ. मुक्ता को साहित्य शिखर एवं डॉ. अत्रि भारद्वाज को शैल शिखर सम्मान दिया गया। काशी प्रांत भाजपा के अध्यक्ष महेशचंद श्रीवास्तव ने कहा कि शैल जी महिला लेखन के सशक्तीकरण की बेमिसाल नजीर हैं। इस दौरान वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. देवी प्रसाद कुंवर, प्रो. श्रद्धानंद, डॉ. सव्यसाची, डॉ. मुक्ता, डॉ. रामसुधार सिंह, डॉ. सीमांत प्रियदर्शी, प्रो. अनिता, डॉ. अंबिका प्रसाद गौड़, डॉ. देवेंद्र कुमार सिंह आदि मौजूद रहे।