पुरानी पाइप लाइनों पर बढ़ा लोड
अधिकारियों ने बताया कि आबादी बढ़ने से पुरानी पाइप लाइनों पर लोड बढ़ गया है। पाइप लाइनों का व्यास बढ़ाने से इस समस्या का हल हो सकता है। शहर की सीवर व्यवस्था सिर्फ और सिर्फ शाही नाले पर ही निर्भर है। वो शाही नाला जिसे मुगलों ने सुरंग के रूप में विकसित किया था।
बाद में ब्रिटिश हुकूमत ने उसे सीवर व्यवस्था में तब्दील कर दिया। नाले की उम्र 200 साल से भी ज्यादा हो गई। जगह-जगह तोड़फोड़ कर लोगों ने अपनी सीवर लाइन जुड़वा ली है। नतीजा यह नाला भी जीर्ण-शीर्ण हो गया।
75.73 करोड़ रुपये से बनाए 5 स्मार्ट वार्ड में भी सीवर ओवरफ्लो
शहर के 100 में से 5 वार्डों को 75.73 करोड़ रुपये से स्मार्ट बनाया गया। इनमें दशाश्वमेध, जंगमबाड़ी, कामेश्वर महादेव, कालभैरव और राजमंदिर वार्ड हैं। इनमें एक एक वार्ड में 12 से 17 करोड़ रुपये खर्च किए गए। नई सीवर पाइप लाइन डाली गई थी। बावजूद इसके इन वार्डों में सीवर समस्या बरकरार है। अब एक बार फिर से इसे दुरुस्त करने की कवायद की जा रही है।
बोले अधिकारी
शहर के 18 ऐसे वार्ड हैं। जहां पर सीवर ओवरफ्लो की सबसे अधिक समस्या है। इसके लिए 15 वें वित्त के फंड का इस्तेमाल किया जाएगा। इन वार्डों में नई सीवर की पाइप लाइन डाली जाएगी। - अशोक कुमार तिवारी, मेयर नगर निगम