सीर गोवर्धन में संत रविदास की जयंती पर देश के कोने-कोने से अनुयायियों का सैलाब उमड़ने के बाद रविवार को इंतजाम छोटे पड़ गए। मेला क्षेत्र के 60 से अधिक शिविरों में जगह नहीं बची। मध्य प्रदेश, राजस्थान, बिहार से आई संगतों के लिए जगह न मिलने के बाद अतिरिक्त पंडाल लगाने का काम शुरू हो गया।
देर रात नीली, लाल पगड़ी बांधे पंजाबियों के सैलाब से गुरु के जन्मस्थान का कोना-कोना पट गया। डेरा सच्च खंड बल्ल के संत निरंजन दास महाराज ने शाम को पंडालों के अलावा मुख्य समारोह स्थल का जायजा लिया।
गुरु रविदास जन्म स्थान पब्लिक चैरिटेबल ट्रस्ट के चेयरमैन और डेरा सच्च खंड बल्ला के गद्दीनशीन संत निरंजन दास महाराज ने कहा कि किसी भक्त को कोई भी असुविधा नहीं होनी चाहिए। उन्होंने शिविर क्षेत्र के इंतजामों का जायजा लेने के बाद ट्रस्ट के पदाधिकारियों को निर्देशित किया कि भक्तों के ठहरने की व्यवस्था में कोई कमी नहीं आनी चाहिए।
शिविर के कंट्रोल रूम में भी वह कुछ देर के लिए रुके रहे। भक्तों के ठहरने के लिए इस बार 60 से अधिक पंडाल लगाए गए हैं। इन पंडालों में पंजाब,हरियाणा, जम्मू-कश्मीर, उत्तराखंड, आंध्र प्रदेश, महाराष्ट्र, बिहार, झारखंड, छत्तीसगढ़ समेत 23 से अधिक राज्यों के अनुयायी पहुंचे हैं। इससे पहले दोपहर में खंजड़ी, एकतारा, ढोल, झांझ पर भक्त शिविरों में भजन गूंजने लगे हैं। लंगर वाले शिविरों में दिन भर लंबी कतारें लगी रहीं।
छह हजार से अधिक सेवादारों ने मेला क्षेत्र से लेकर लंगर व्यवस्था, मंदिर परिसर, कंट्रोल रूम और सुरक्षा की जिम्मेदारी संभाल ली। मंदिर से शिविर क्षेत्र को जोड़ने वाली सड़क की दोनों पटरियों पर पांच सौ से अधिक दूकानें लग गईं। झूले,चर्खियों पर बच्चों के रमने के साथ ही मेला पूरी तरह गुलजार हो गया।