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उपलब्धि: वैज्ञानिकों ने मानव फिंगरप्रिंट पैटर्न में खोजे 43 म्यूटेशन, बीएचयू की डॉ. चंदना भी टीम में शामिल 

Wed, 12 Jan 2022 12:19 AM IST
गीतार्जुन गौतम न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी

सार

सीजीडी के समन्वयक प्रो. परिमल दास ने कहा नई तकनीकी जैसे, जीन अध्ययन, प्रोटीन नेटवर्क, पॉप्यूलेशन जेनेटिक्स का इस्तेमाल कांप्लेक्स ट्रेट के अध्ययन में बहुत लाभकारी है और समय की मांग भी है।
 
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बीएचयू के सेंटर फॉर जेनेटिक डिसऑर्डस की डॉ. चंदना। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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मनुष्यों में फिंगरप्रिंट पैटर्न के लिए जिम्मेदार जीन की खोज वैज्ञानिकों ने की है। वैश्विक स्तर पर अध्ययन का जो परिणाम आया है, उसके अनुसार टीम ने मानव फिंगरप्रिंट पैटर्न में योगदान देने वाले 43 म्यूटेशन की पहचान की है। चीन, ऑस्ट्रेलिया, ब्रिटेन, अमेरिका और भारत के शोधकर्ताओं ने यह अध्ययन किया है।

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इसमें बीएचयू के सेंटर फॉर जेनेटिक डिसऑर्डस की डॉ. चंदना भी शामिल हैं। इस शोध का प्रकाशन अंतरराष्ट्रीय स्तर के शोध पत्र में हुआ है। डॉ. चंदना के मुताबिक, शोध में पाया गया है कि मनुष्यों में फिंगरप्रिंट पैटर्न अंग विकास जीन द्वारा निर्धारित होते हैं।

फिंगरप्रिंट एक व्यक्ति की पहचान होती है और यह तीन प्रकार के होते हैं, जिन्हें आर्च, लूप और व्होर्ल कहते हैं। फिंगरप्रिंट पैटर्न के लिए जिम्मेदार जींस को समझने के लिए टीम ने विश्व के 23 हजार से अधिक व्यक्तियों के डीएनए का अध्ययन किया और 43 म्यूटेशन (एसएनपी) की पहचान की।
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अध्ययन की खास बात यह है कि ज्यादातर म्यूटेशन त्वचा के विकास से संबंधित जीन के बजाय अंग विकास से जुड़े हैं। इन जींस में मुख्य रूप से एक ईवीआई1 नामक जीन पाया गया, जो भ्रूण अंग विकास में अपनी भूमिका के लिए जाना जाता है। टीम ने इस जीन का चूहों पर परीक्षण किया।

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चूहों के फिंगरप्रिंट नहीं होते : डॉ. चंदना

पाया कि इसकी कम एक्सप्रेशन वाले जेनेटिक्ली मोडिफाइड चूहों ने सामान्य चूहों की तुलना में अपने डिजिट्स पर असामान्य पैटर्न विकसित किए। यह भी पता चला है कि हाथ और फिंगरप्रिंट पैटर्न का अनुपात आपस में संबंधित है। 

डॉ. चंदना ने बताया की चूहों में कोई फिंगरप्रिंट नहीं होते हैं, लेकिन लकीरें पाई जाती हैं। जिनकी गणना बहुत ही दिलचस्प थी। इसके लिए हमने एक नई विधि ईजाद की। सीजीडी के समन्वयक प्रो. परिमल दास ने कहा नई तकनीकी जैसे, जीन अध्ययन, प्रोटीन नेटवर्क, पॉप्यूलेशन जेनेटिक्स का इस्तेमाल कांप्लेक्स ट्रेट के अध्ययन में बहुत लाभकारी है और समय की मांग भी है।

विज्ञान संस्थान के निदेशक प्रो. अनिल कुमार त्रिपाठी ने कहा अंग विकास के साथ फिंगरप्रिंट पैटर्न का जुड़ाव विकासात्मक जीव विज्ञान का एक नया आयाम है जिसके महत्वपूर्ण वैज्ञानिक और सामाजिक प्रभाव हो सकते हैं। 
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