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दो पूर्व कुलपति, वित्त नियंत्रक और प्रकाशन निदेशक को भेजा गया नोटिस

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संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय के करोड़ों के घोटाले के मामले में आर्थिक अपराध अनुसंधान संगठन (ईओडब्ल्यू) की ओर से दो पूर्व कुलपति, पूर्व वित्त नियंत्रक और पूर्व प्रकाशन निदेशक को नोटिस जारी किया गया है। सभी से कहा गया है कि अविलंब बयान दर्ज कराएं। साथ ही अब तक विश्वविद्यालय के 14 कर्मचारियों का बयान किया गया है। अधिकतर का कहना यही है कि वह तो निम्न पदों पर तैनात कर्मचारी हैं। वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देश पर कागजात तैयार कर उनके सामने फाइल प्रस्तुत करना ही उनकी जिम्मेदारी है।
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सरकार ने दुर्लभ पांडुलिपियों के प्रकाशन के लिए विश्वविद्यालय को वर्ष 2001 से 2010 के बीच 10 करोड़ 20 लाख 22 हजार रुपये का अनुदान दिया था। आरोप है कि पांडुलिपियों के प्रकाशन के लिए तीन करोड़ 66 लाख 96 हजार 237 रुपये का उपयोग किया गया। इसके अलावा शेष धनराशि का गबन कर लिया गया। विश्वविद्यालय प्रशासन ने बड़े पैमाने पर हुए घोटाले को देखते हुए चेतगंज थाने में मुकदमा दर्ज कराया था। प्रदेश सरकार ने प्रकरण की गंभीरता को देखते हुए जांच ईओडब्ल्यू को सौंप दी। जांच के क्त्रस्म में इंस्पेक्टर विश्वजीत सिंह वर्तमान और सेवानृवित्त कर्मियों का बयान दर्ज कर रहे हैं। जांच अधिकारी के अनुसार, सबका बयान दर्ज करने और प्रकरण से संबंधित साक्ष्य जुटाने के बाद अदालत में आरोप पत्र दाखिल किया जाएगा। फिलहाल दो पूर्व कुलपति सहित पांच लोगों को नोटिस भेज कर जल्द बयान दर्ज कराने के लिए कहा गया है।
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