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भदोही स्कूल वैन हादसे में झुलसी बच्ची ने तोड़ा दम, आईसीयू में चल रहा था उपचार

Fri, 18 Jan 2019 10:42 AM IST
utpal utpal न्यूज डेस्क,अमर उजाला,वाराणसी
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- फोटो : amar ujala
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भदोही में पिछले शनिवार को स्कूली वैन में आग लगने के बाद झुलसी बच्ची दिशा यादव (6) की गुरुवार सुबह को बीएचयू ट्रामा सेंटर में इलाज के दौरान मौत हो गई। भदोही के भगवास निवासी कैलाश यादव की पुत्री दिशा पहले दिन से ही आईसीयू में भर्ती थी। कैलाश का अभी एक बेटा प्रियांश जनरल सर्जरी वार्ड में भर्ती है।
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भदोही के लखनो गांव में 12  जनवरी को सुबह स्कूली वैन में गैस सिलेंडर लीक होने से लगी आग में 19 बच्चे झुलस गए थे। इसमें पहले दिन चार बच्चों की हालत गंभीर होने पर उन्हें आईसीयू में भर्ती कराया गया था, इसमें दिशा यादव भी थी। दो दिन बाद तीन और बच्चों को आईसीयू में शिफ्ट कर दिया गया था। इसके बाद दो और बच्चे आईसीयू में शिफ्ट कर दिए गए थे।

नौ बच्चों का आईसीयू में जबकि 10 का जनरल सर्जरी वार्ड में इलाज चल रहा है। इधर, गुरुवार सुबह 8:45 बजे आईसीयू में भर्ती दिशा की मौत हो गई। परिजनों  को जैसे ही यह जानकारी मिली, सब आईसीयू के बाहर पहुंचे। पिता कैलाश और माता प्यारी देवी फफक-फफक कर रो पड़ी।
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कुछ देर बाद आईसीयू से शव को बाहर निकालकर ट्रामा सेंटर के मोर्चरी हाउस में रखवा दिया गया। दोपहर करीब एक बजे पुलिस की मौजूदगी में कागजी कार्रवाई के बाद परिजन शव को लेकर बीएचयू पोस्टमार्टम हाउस पहुंचे, जहां पोस्टमार्टम के बाद अंतिम संस्कार किया गया। 

आईसीयू में अभी इनका चल रहा इलाज
माही (7),रानी (5),आयुष (7), आस्था यादव(6), नैनसी सिंह(10), आरूषि सिंह (8), प्रिंस(6), अंश सिंह(8) 

जनरल वार्ड में ये हैं भर्ती 
सीता शुक्ला(55), क्रिंजल(7), अश्विनी सिंह (5), विराट (5),  गोविंद (10), अभिषेक (7), साधना (8), अनिकेत (8), ओम (7), प्रियांश (7), श्रेयांश(8) 

कभी न भूलने वाला दर्द दे गया स्कूल वैन हादसा 

लखनो स्कूल वैन हादसा भगवास गांव को कभी न भूलने वाला दर्द दे गया। 12 फरवरी को लखनो गांव में आग का गोला बनी मारुति वैन में इस गांव के चार घरों के छह बच्चे झुलस गए। इनमें से तीन बच्चे आईसीयू में जिंदगी की जंग लड़ रहे थे, जिनमें से एक बच्ची दिशा यह लड़ाई हार गई।

यह खबर पहुंचते ही पहले से मातम में डूबे गांव में मानो वज्रपात हो गया। कई घरों में चूल्हे नहीं जले। लखनो वैन हादसे में झुलसे 19 बच्चों में से बृहस्पतिवार को एक और बच्ची आस्था को भी ट्रामा सेंटर के आईसीयू में शिफ्ट कर दिया गया। इससे आईसीयू में बच्चों की संख्या फिर आठ हो गई है। जबकि जुड़वां भाई-बहन आयुष और माही पहले से ही आईसीयू में हैं।

लखनो स्कूली वैन हादसे में जिंदगी की जंग लड़ रही पांच साल की दिशा ने दुनिया को अलविदा कह दिया। इसके बाद उसके घर समेत समूचे गांव में मातम पसर गया। गांव में पसरा सन्नाटा इस घटना के दर्द को बयां करने के लिए काफी था। दोपहर दो बजे गांव में पहुंची अमर उजाला की टीम को बच्ची की मौत की खबर सुनने के बाद उसके घर सांत्वना देने वालों का तांता लगा दिखा, लेकिन घर पर सिवा सन्नाटे के और कुछ नहीं था।

घर के ज्यादातर लोग बनारस में हैं। दिशा का भाई प्रियांशु भी झुलसा है। उसका उपचार भी बीएचयू में चल रहा है। पिता कैलाश यादव मुंबई में रहकर ऑटो चलाते हैं। दोनों बच्चे प्रियांश और दिशा एससी कॉन्वेंट स्कूल में पढ़ने जाते थे। दुर्भाग्य ऐसा क्रूर मजाक किया कि पूरा परिवार गमगीन हो गया है। इसी गांव के सुरेंद्र यादव के दो जुड़वा बच्चे माही और आयुष भी ट्रामा सेंटर के आईसीयू में हैं। उनके परिवार में भी मातम पसरा है। 
 
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हादसे को याद कर सिहर जाते हैं ग्रामीण 

 लखनो स्कूल वैन हादसे के बाद भगवास और शिवरामपुर गांवों में आधी से ज्यादा आबादी गम में डूबी है। जो घर बच्चों की चहल पहल से हमेशा गुलजार रहता था, उसमें छाए सन्नाटे से गांव वाले स्तब्ध हैं। भगवास गांव में दिनेश यादव का बेटा ओम (6), अवधेश कुमार यादव का बेटा श्रेयांश (9) और सुरेंद्र यादव की बेटी माही (6) बेटा आयुष (6) शामिल हैं।

बृहस्पतिवार को दोपहर में चारों के घर पर सन्नाटा छाया हुआ था। वहां मौजूद गांव के लोग दिशा की मौत व्यवस्था को कोसते रहे। गांव के लालमनि यादव, जगतनाथ यादव, शिवपूजन यादव, छविनाथ यादव और मुकेश कुमार यादव ने कहा अब तो मारुति वैन से बच्चों को स्कूल भेजने से घृणा होने लगी है। हादसे को यादकर आज भी  रूह कांप जाती है।

हादसे का दर्द बयां करते कई ग्रामीणों की आंखें भर आईं। कहा जिन मासूमों को मां बाप की गोद में खेलना चहिए था, आज वह अस्पताल में जिंदगी और मौत के बीच जूझ रहे हैं। बताया कि वैन हादसे में गांव के चार घर से छह बच्चे गंभीर रूप से झुुलस गए थे। वहीं दीक्षा की मौत ने पूरे गांव को गम में डूबा दिया है।

अब गांव वाले एक की बात कह रहे हैं कि बच्चों के घर की खुशियां छीनने वाले आरोपी किसी कीमत पर बख्शे नहीं जाने चाहिए। ताकि भविष्य में किसी के घर की खुशियां न छिने। इस दौरान कुछ लोगों ने कहा अगर जिला प्रशासन यह सख्ती पहले की दिखाई होती तो आज मौत और मायूसी का यह गम न देखना पड़ता।
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