काशीवासियों को काशी में ही 33 कोटि देवी-देवता, तीर्थ, यक्ष और गंधों के दर्शन सुलभ हैं। बाबा विश्वनाथ के आगमन के साथ ही सभी उनके साथ काशी में ही विराजमान हो गए थे। द्वादश ज्योतिर्लिंग में प्रथम सोमेश्वर महादेव भी भगवान शिव के साथ काशी आए थे।
शिव महापुराण में सोमेश्वर ज्योतिर्लिंग के महात्म्य के संबंध में कथा वर्णित है कि महात्मा प्रजापति दक्ष ने चंद्रदेव को क्षयरोग से ग्रसित होने का शाप दे दिया। चंद्रदेव क्षीण हो गए। इससे चारों ओर हाहाकार मच गया। तव देवताओं और ऋषियों के कहने पर ब्रह्माजी की आज्ञा के अनुसार चंद्रदेव ने प्रभास क्षेत्र में छह महीने तक निरंतर तपस्या की और मृत्युंजय मंत्र से भगवान शिव का पूजन किया।