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काशी में कुबेर: मां अन्नपूर्णा ने फोड़ दी थी कुबेर की बायीं आंख, इनकी तपस्या से पकट हुए कुबेरेश्वर महादेव

Thu, 15 Aug 2024 04:33 PM IST
प्रगति चंद अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।

सार

काशी में कुबेर की तपस्या से कुबेरेश्वर महादेव प्रकट हुए। शिवलिंग पर नियमित दीप जलाकर कुबेर ने भगवान शिव की तपस्या की थी। मान्यता है कि कुबेरेश्वर के दर्शन मात्र से श्रद्धालुओं को कभी न धन की हीनता (कमी) होगी, न मित्र से वियोग होगा। 
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कुबेरेश्वर महादेव - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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हरि अनंत हरि कथा अनंता... अर्थात जिस तरह से भगवान अनंत हैं उसी तरह से उनकी कथाएं भी अनंत हैं। बात जब शिव नगरी की होती है तो शिव के अनंत स्वरूप में यहां कण-कण में विराजमान शिव की भी कथा भी निराली है। इसलिए कहा गया है कि प्रयाग मुंडे, गया पिंडे और काशी ढूंढे...। काशी में जितना ढूढेंगे उतने ही शिव स्वरूपों से साक्षात्कार होगा।

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अन्नपूर्णा मंदिर में विराजमान कुबेरेश्वर महादेव भक्तों को धन प्रदान करने के साथ ही पाप, दरिद्रता और दुख को दूर करते हैं। कुबेरेश्वर के दर्शन मात्र से श्रद्धालुओं को कभी न धन की हीनता (कमी) होगी, न मित्र से वियोग होगा। जो मनुष्य विश्वेश्वर के दक्षिण-भाग में स्थित इस कुबेरेश्वरलिंग का दर्शन-पूजन करेगा, वह कभी न तो पाप से, न दरिद्रता से और न दुःख से लिप्त होगा। भगवान शिव की कृपा पाने के लिए कुबेर ने काशी में तपस्या की और शिवलिंग पर दीप जलाकर नियमित तप करने लगे।

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कुबेर की तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान शिव विशालाक्षी अन्नपूर्णा के साथ प्रकट हुए। भगवान का तेज अधिक होने के कारण कुबेर की आंखें ही नहीं खुल रही थीं। कुबेर ने कहा भगवान आप अपने चरणों के दर्शन का सामर्थ्य मुझे दे दीजिए। उमापति ने कुबेर का यह वचन सुनकर करतल से स्पर्शकर उनको दर्शन का सामर्थ्य प्रदान किया। 

कुबेर ने जब आंखें खोलीं तो वह मां अन्नपूर्णा को ही देखने लगे। वह सोचने लगे कि महादेव के समीप यह कौन सर्वांग सुंदरी है? क्या इसने मुझसे भी अधिक तपस्या की है? इस सुंदरी का कैसा रूप? कैसा प्रेम? कैसी असामान्य सौभाग्यलक्ष्मी है? यह कहते हुए बारबार क्रूर-दृष्टि से वाम नेत्र से देवी को देखने के कारण उनकी बायीं आंख फूट गई। देवी ने महादेव से कहा- यह दुष्ट तपस्वी बारंबार क्यों मुझे निहार रहा है। 

देवी की बात सुनकर महादेव कहते हैं यह तुम्हारा पुत्र है। उन्होंने कुबेर को वरदान दिया कि तुम सब निधियों के स्वामी और गुह्यकों के अधीश्वर होगे। यक्षों के, किन्नरों के और राजाओं के राजा, पुण्यजनों (राक्षसों) के अधिपति और सब किसी के धनदाता हो। मेरे साथ तुम्हारी मैत्री हुई है इसलिए मैं तुम्हारे निकट विराजमान रहूंगा।
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