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Sawan: एक पहर में बनकर तैयार हो गया था काशी का ये मंदिर, भगवान शिव के कहने पर मां पार्वती ने कराया था निर्माण

Mon, 19 Aug 2024 06:01 PM IST
प्रगति चंद अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।

सार

Ratneshwar Mahadev Temple : मंदिरों के शहर काशी का इकलौता मंदिर रत्नेश्वर महादेव का है, जिसका निर्माण भगवान शिव के कहने पर माता पार्वती ने कराया था। 
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रत्नेश्वर महादेव मंदिर - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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नानारत्नानि लभ्यन्ते रत्नेशानुग्रहादुमे। स्त्रीरत्नपुत्ररत्नादिस्वर्गमोक्षावपि प्रिये...अर्थात हे प्रिये ! उमे ! रत्नेश्वर की कृपा से नानाप्रकार के रत्न, स्त्रीरत्न, पुत्ररत्न, स्वर्ग और मोक्ष इत्यादि सब कुछ पाया जाता है। शहर के महामृत्युंजय मंदिर मार्ग पर वृद्धाकाल मोहल्ले में रत्नेश्वर महादेव भक्तों को वंशवृद्धि का आशीर्वाद भी देते हैं। यह काशी का इकलौता मंदिर है जिसका निर्माण भगवान शिव के कहने पर माता पार्वती ने किया था।

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काशीमाहात्म्य में वर्णित है कि गौरी और शंकर के विवाह के बहुत दिनों बाद गौरी की का कुशल-क्षेम जानने के लिए हिमालय राज काशी आए। वे अगणित मणिमाणिक्य रत्न और अलंकार-वस्त्रादि लेकर वरुणा के तट पर पहुंचे। वहां भूलोक-स्वर्गलोक से भी बढ़कर अनंत वैभवमंडित मंदिर और नगरी देखकर गिरीश (हिमालय) चकित हो गए। वे सोच रहे थे कि ऐसी संपत्तिशाली तो कुबेरपुरी और वैकुंठलोक भी नहीं है। 

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काशी का वैभव शिवनगरी, शिवमंदिर और शिवलिंग की महिमा सुनकर गिरिराज उसके सामने अपने मणिमाणिक्यादि के उपहार को तुच्छ जानकर लज्जित हो गए। उन्होंने काशी में चंद्रकांतमणि के शैलेश्वर शिवलिंग की स्थापना की। इसके बाद पंचगंगा स्नान और कालभैरव का दर्शन कर और सब रत्नों को रखकर हिमवान वापस लौट गए।

भगवान शिव और पार्वती जब पहुंचे तो राजा हिमवान के रत्नों से रत्नेश्वर महादेव प्रकट हुए। भगवान शिव के कहने पर माता पार्वती ने नंदी से प्रहर भर में रत्नेश्वर महादेव के मंदिर का निर्माण कराया। भगवान शिव ने कहा कि हे गिरिजे ! सब लोगों को सब कुछ देने वाले स्थावररूप इस रत्नेश्वर लिंग के प्रभाव की तुलना नहीं है और इस रत्नेश्वर शिवलिंग में मेरी बड़ी ही प्रीति है। 

जो कोई नित्य ही इस रत्नेश्वर के उपाख्यान का पाठ करेगा, उसे कभी पुत्र, पौत्र और पालित पशुओं का वियोग नहीं सहन करना पड़ेगा। हे देवि ! रत्नेश्वर के समीप कृष्णपक्ष की चतुर्दशी के दिन उपवास रहकर रात्रि में जागरण करने से मेरा सान्निध्य प्राप्त होता है तथा यह रत्नेश्वर का माहात्म्य मैंने तुमसे वर्णन किया, कलियुग के पापियों से इसे सदैव पूर्णरीति से छिपाना (गोपनीय रखना) ही चाहिए।
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