नानारत्नानि लभ्यन्ते रत्नेशानुग्रहादुमे। स्त्रीरत्नपुत्ररत्नादिस्वर्गमोक्षावपि प्रिये...अर्थात हे प्रिये ! उमे ! रत्नेश्वर की कृपा से नानाप्रकार के रत्न, स्त्रीरत्न, पुत्ररत्न, स्वर्ग और मोक्ष इत्यादि सब कुछ पाया जाता है। शहर के महामृत्युंजय मंदिर मार्ग पर वृद्धाकाल मोहल्ले में रत्नेश्वर महादेव भक्तों को वंशवृद्धि का आशीर्वाद भी देते हैं। यह काशी का इकलौता मंदिर है जिसका निर्माण भगवान शिव के कहने पर माता पार्वती ने किया था।
काशीमाहात्म्य में वर्णित है कि गौरी और शंकर के विवाह के बहुत दिनों बाद गौरी की का कुशल-क्षेम जानने के लिए हिमालय राज काशी आए। वे अगणित मणिमाणिक्य रत्न और अलंकार-वस्त्रादि लेकर वरुणा के तट पर पहुंचे। वहां भूलोक-स्वर्गलोक से भी बढ़कर अनंत वैभवमंडित मंदिर और नगरी देखकर गिरीश (हिमालय) चकित हो गए। वे सोच रहे थे कि ऐसी संपत्तिशाली तो कुबेरपुरी और वैकुंठलोक भी नहीं है।