सावन के अधिमास में पंचक्रोशी यात्रा मंगलवार को मणिकर्णिका घाट से संकल्प लेकर शुरू हुई। हजारों श्रद्धालुओं ने व्यासपीठ से संकल्प लेकर यात्रा की शुरुआत की। काशी विश्वनाथ से आशीर्वाद लेकर श्रद्धालुओं का जत्था घाटों व गलियों से होते हुए अस्सी घाट पहुंचा। यहां से जत्था कंदवा स्थित कर्दमेश्वर महादेव के दर्शन के लिए रवाना हुआ। पंचक्रोशी यात्रा के श्रद्धालु परिक्रमा मार्ग के पांच पड़ाव कंदवा, भीमचंडी, रामेश्वर, शिवपुर और कपिलधारा होते हुए मणिकर्णिका पहुंच कर संकल्प पूरा करते हैं। यह यात्रा सावन के अलावा शिवरात्रि और अधिमास में की जाती है।
ज्योतिषाचार्य ऋषि द्विवेदी ने बताया कि स्कंद पुराण में यात्राओं के महत्व का उल्लेख मिलता है। अधिमास में श्रावण मास जुड़ जाने पर पंचक्रोशी यात्रा का महत्व और भी बढ़ जाता है। चातुरसास में काशी वास और श्रावण मास की वृद्धि इसे और भी महत्वपूर्ण बनाती है। श्रावण नक्षत्र का स्वामी चंद्रमा है, जिसे भोलेनाथ ने अपने मस्तक पर विराजमान किया है। श्रावण में सोमवार, प्रदोस, शिवरात्रि का विशेष महत्व है। इस मास में पंचक्रोशी परिक्रमा करने से मोक्ष की प्राप्ति होती है।