सर्व सेवा संघ को तोड़े जाने के विरोध में गांधी विचारक धरने पर बैठे
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लोकतंत्र सेनानी राम धीरज के नेतृत्व में सभी ने विरोध मार्च निकालकर नारेबाजी की। वक्ताओं ने कहा कि जमीन की रजिस्ट्री और डीड पेपर होने के बाद भी शासन और प्रशासन मनमानी कर रहे हैं। वह किसी भी कीमत पर राष्ट्रपिता महात्मा गांधी, विनोबा भावे और जयप्रकाश नारायण की विरासत को जमींदोज नहीं होने देंगे। शासन व प्रशासन के बुलडोजर का मुंह बापू के अहिंसा के हथियार से दिल्ली की ओर मोड़ देंगे।
सर्व सेवा संघ की स्थापना मार्च 1948 में भारत के प्रथम राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद की अध्यक्षता में हुई थी। विनोबा भावे के मार्गदर्शन में करीब 62 वर्ष पहले नींव रखी गई। इसका उद्देश्य महात्मा गांधी के विचारों का प्रचार-प्रसार करना था। 1960 में इस जमीन पर गांधी विद्या संस्थान की स्थापना के प्रयास शुरू हुए। भवन का पहला हिस्सा 1961 में बना था। 1962 में जय प्रकाश नारायण यहां रहे थे।
सर्व सेवा संघ के रामधीरज ने बताया कि रेलवे से 2007 में शुरू विवाद के बाद गांधी विद्या संस्थान पर ताला लग गया। कोर्ट ने मंडलायुक्त की अध्यक्षता में संचालक मंडल बनाया। 2007 से 14 मई 2023 तक संस्थान पर जिला प्रशासन का ताला बंद रहा। सर्व सेवा संघ की ओर से लिखित रूप से निवेदन किया गया कि संस्थान की लाइब्रेरी अमूल्य है, किताबें नष्ट हो रही हैं। इसकी जिम्मेदारी सर्व सेवा संघ को दे दी जाए। बावजूद प्रशासन ने इसे इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र को सौंप दिया।