अश्विनी भिड़े देशपांडे के गायन पर लोग झूमे तो पं. भवानी शंकर ने पखावज पर शिव परन और डमरू परन से संगीत प्रेमियों को भाव विभोर कर दिया। मुंबई की सांस्कृतिक संस्था बैनियन ट्री की ओर से अस्सी घाट पर आयोजित दो दिनी संगीत समारोह की आखिरी निशा नामी कलाकारों की प्रस्तुतियों से यादगार बनी।
शाम साढ़े छह बजे दीप प्रज्ज्वलन के बाद पाणिनी कन्या महाविद्यालय की छात्राओं की वेद ऋचाओं के सस्वर पाठ से कार्यक्रम की शुरुआत हुई। सबसे पहले पं. भवानी शंकर ने पखावज पर तीन ताल में उठान, परन, तोड़ी, टुकड़ा और रेला बजाया। गंगा को समर्पित कई श्लोकों पर उन्होंने ताल बजाए। शिव परन और डमरू परन की प्रस्तुति सराही गई। इनके बाद अश्विनी भिड़े देशपांडे ने राग केदार में भजन से संगीत निशा को आगे बढ़ाया। पायो जी मैंने राम रतन धन पायो... के बाद राग वसंत में दूसरी बंदिश-बगवा ब्रज देखन को चलो री...की मोहक प्रस्तुति की।
इसके बाद ठुमरी अंग में होरी की बंदिश- क्यों गुलाल रंग डारो सुनाकर उन्होंने तालियां बटोरीं। इनके बाद उनकी बारी आई, जिनका लोगों को शिद्दत से इंतजार था। संतूर वादक पं. शिव कुमार शर्मा के मंच पर आते ही हर हर महादेव के उद्घोष गूंजने लगे। बनारस के संगीत प्रेमी श्रोताओं का उन्होंने अभिवादन किया। गंगा आरती के घंटे बजने की वजह से साज मिलाने के लिए उन्हें कुछ इंतजार करना पड़ा। उन्होंने शुरुआत की राग कौशिकी कान्हड़ा से। अलाप, जोड़, झाला की बहुत सधे मिजाज में उन्होंने प्रस्तुति की। जोड़ पर पखावज की संगत खास रही। भवानी शंकर ने पखावज पर संतूर के स्वरों के साथ ताल का समन्वय किया। इसी राग में उन्होंने रूपक ताल और फिर तीन ताल की बंदिशें बजाईं। इस दौरान तालियों की गड़गड़ाहट गूंजती रही।
मंडलायुक्त नितिन रमेश गोकर्ण, ठुमरी गायक पं. छन्नूलाल मिश्र, क्षेत्रीय सांस्कृतिक केंद्र प्रमुख डॉ. रत्नेश वर्मा समेत तमाम लोग उपस्थित थे। अंत में कलाकारों को स्मृति चिह्न और अंग वस्त्रम से सम्मानित किया गया। बनियान ट्री के निदेशक महेश बाबू ने धन्यवाद ज्ञापित किया। संचालन नंदिनी महेश ने किया ।