संगीत में लोक और शास्त्र के अनूठे संगम से गुरुवार की रात शिवरात्रि संगीत महोत्सव का जोरदार आगाज हुआ। प्रख्यात संतूर वादक पद्मविभूषण पं. शिव कुमार शर्मा ने सौ तारों वाले साज पर अद्भुत गतकारी से फिजा बदल दी, तो पद्मभूषण डी. राजा ने कुचिपुड़ी नृत्य की थिरकन से संगीत निशा के लम्हों को यादगार बना दिया। उस्ताद फतेह अली खान की शहनाई पर होरी, चैती की धुनों से फिजा बदल गई।
दुर्गाकुंड स्थित हनुमान प्रसाद पोद्दार अंध विद्यालय में भागवत कथा मर्मज्ञ संत रमेशभाई ओझा की मौजूदगी में रात करीब नौ बजे शिवरात्रि संगीत समारोह की शुरुआत उस्ताद फतेह अली खान की शहनाई से हुई। उन्होंने राग पूरिया धनाश्री में विलंबित द्रुत तीन ताल में धुन बजाकर संगीत प्रेमियों पर सुरों का सम्मोहन चलाया। इसके बाद होरी की बंदिश -कैसी धूम मचाई बिरज में ... को बजाकर जमकर वाहवाही बटोरी। तबले पर ललित कुमार, हरमोनियम पर अरूण कुमार अस्थाना ने संगत की। इनके बाद बारी आई पद्मविभूषण पं. शिव कुमार शर्मा की।
उन्होंने संतूर पर राग झिंझोटी की अवतारणा की। अलाप, जोड, झाला के बाद झप ताल एवं तीन ताल में निबद्ध गत प्रस्तुत की। तबले पर संगत की पं. राम कुमार मिश्र ने। तानपुरे पर जापान के ताकाहीरो थे।
आखिरी प्रस्तुति पद्मभूषण पं. राजा रेड्डी और राधा रेड्डी के कुचिपूड़ी नृत्य की थी। महोत्सव का शुभारंभ अनुभवानंद जी महाराज, छन्नू लाल मिश्रा, राधेश्याम पोद्दार, ललित जालान, किशन कुमार जालान ने संयुक्त रूप से दीप जलाकर किया। कलाकारों एवं अतिथियों का स्वागत भगीरथ जालान एवं अखिलेश खेमका ने किया। संचालन प्रतिमा सिन्हा ने किया।