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संतूर के तारों पर स्वरों की अठखेलियां

Sun, 01 May 2016 02:16 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, वाराणसी
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संतूर वादन करते पं. भजन सोपोरी।
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संतूर के तारों पर अखरोट की इठलाती कलमों से पं. भजन सोपोरी ने हर दिल में ऐसी लय छेड़ी कि लोग मंत्रमुग्ध हो उठे। तारों की खनक के साथ ही सुबह हो गई और लोग लय के आनंद में रमे रहे। इससे पहले कदरी गोपाल नाथ के सेक्सोफोन और रीतेश-रजनीश मिश्र के गायन की भी जमकर तारीफ हुई। संकट मोचन संगीत समारोह में चेन्नई से आए पं. कदरी गोपाल नाथ ने सेक्सोफोन पर आदिताल में गणेश वंदना की। इसके बाद उन्होंने कर्नाटक शैली में रूपक ताल में निबद्ध पवन गुरु पवन पुरा के बाद अबेरी राग में नगमों की प्रस्तुति की। फिर तीन ताल में आलाप बजाया। इसके बाद वायलिन पर अवसरल कन्या कुमारी, तबले पर राजेंद्र नाकोड़, मृदंगम पर प्रवीण, मोरसिंग पर बेंगलूरू राजशेखर की जुगलबंदी खूब जमी। अंत में वैष्णव जन ते तेणे कहिए... की प्रस्तुति की। फिर पं. रीतेश मिश्र और पं. रजनीश मिश्र ने राग वसंत मुखारी में विलंबित ताल में निबद्ध बंदिश-प्रभु गुन गाओ आज सब मिल के...से शुरुआत की। इसके बाद द्रुत तीन ताल में-मनवा भजे हरि नाम... को पेश किया। इसके बाद फिर मतवारा सजन आयो रे... को सुनाकर संगीत प्रेमियों को मुग्ध किया। फिर राग रामकली में तराना से समापन किया। संकट मोचन की आरती के बाद बारी आई पं. भजन सोपोरी की। इन्होंने राग अहिर ललित की अवतारणा की। आरती के बाद आए सोपोरी ने सुबह सवा सात बजे तक संतूर बजाया। राग शहाना में एक बंदिश के बाद उन्होंने एक हाथ से माइक थाम कर भजन गाया और दूसरे हाथ से संतूर बजाते रहे।
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ओडिसी नृत्यांगना पद्मविभूषण सोनलमान सिंह ने कभी भावों-ईशारों से प्रकृति से लेकर परमात्मा तक के दर्शन कराए तो कभी थिरकन की लयात्मकता से अंतर मन छू लिया। संतूर के तारों पर मोहनवीणा की जुगलबंदी यादगार बनीं तो प्रख्यात सरोद वादक आशीष खां ने स्वरों के समन्वय से संगीत प्रेमियों के जेहनोदिल में अपनी जगह बनाई। जग विख्यात संकट मोचन संगीत समारोह की पांचवीं निशा नृत्य और वादन के चोटी के कलाकारों के नाम रहीं।


कोलकाता से आए प्रख्यात संतूर वादक पं. तरुण भट्टाचार्य ने संतूर की अनूठी जुगलबंदी से आगाज किया। उन्होंने राग भूपाली की अवतारणा की। अलाप, जोड़ के बाद छोटी, छोटी गत बजानेके बाद उन्होंने बांग्ला लोकधुन भटियाली बजाकर संगीत प्रेमियों को मुग्ध किया। इनके साथ चार अन्य कलाकार संतूर पर साथ दे रहे थे, जिनमें चित्रदीप सरकार, तापस सेन गुप्ता, कुणाल साहा, अरण्य चौधरी और मोहन वीणा पर प्रदीप नाग थे। तबले पर ज्योतिर्मय राय चौधरी ने संगत की। इनके बाद पद्मविभूषण सोनलमान सिंह ने ओडिसी नृत्य का जादू चलाया।  तुलसी दास की रामकथा पर भावपूर्ण नृत्यमय आराधना उन्होंने की। भगवान राम के बाल्यकाल के कौशिल्या के मातृत्व प्रेम से लेकर फुलवारी में राम-सीता के प्रेम मिलन के भावों को नृत्य के भावों में संजोया। राम तेरे हैं राम मेरे हैं सबके हैं राम... की बंदिश को सुरों से सजाने के साथ उन्होंने नृत्य की प्रस्तुति की। पखावज पर ऋषिशंकर उपाध्याय, मर्दल पर प्रदीप्त कुमार मोहराना, बांसुरी पर विनय प्रसन्ना ने संगत की। गायन किया बंकिम सेठी ने।
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इनके बाद अमेरिका से आए उस्ताद आशीष खां ने सरोद पर राग बागेश्वरी की अवतारणा की। सरोद त्रिवेणी में इनका साथ दिया शिराज खां और अतीश मुखोपाध्याय ने। अलाप, जोड़, झाला के बाद उन्होंने गई गतें बजाई। फिर राग कौशिकी कान्हाड़ की उन्होंने अवतारणा की। विलंबित, मध्य लय के बाद द्रुत बंदिश बजाकर उन्होंने तालियां बटोरीं। तबले पर संगत की उस्ताद प्राणेश खां व बद्रीनारायण ने।
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