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UP: हनुमानगढ़ी विवाद में संत समिति की एंट्री, बृजभूषण के बयान पर उठाए सवाल; कहा- हमारे पास प्रमाण हैं

Sun, 19 Jul 2026 11:15 AM IST
Aman Vishwakarma अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।

सार

Varanasi News: हनुमानगढ़ी में नमाज विवाद पर अखिल भारतीय संत समिति के राष्ट्रीय महामंत्री स्वामी जीतेंद्रानंद सरस्वती ने पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह के बयान पर सवाल उठाए। उन्होंने दावा किया कि वर्ष 2003 में हनुमानगढ़ी परिसर में नमाज हुई थी और इसके समर्थन में ट्रस्ट डीड, अदालत के आदेश व ऐतिहासिक तथ्यों का हवाला दिया।
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अखिल भारतीय संत समिति के महामंत्री स्वामी जीतेंद्रानंद सरस्वती। - फोटो : अमर उजाला
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Hanuman Gadhi Ayodhya: अयोध्या की हनुमानगढ़ी में नमाज को लेकर छिड़े विवाद में अब अखिल भारतीय संत समिति और गंगा महासभा भी खुलकर सामने आ गई है। अखिल भारतीय संत समिति और गंगा महासभा के राष्ट्रीय महामंत्री स्वामी जीतेंद्रानंद सरस्वती ने पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह के हालिया बयान पर सवाल उठाते हुए दावा किया कि वर्ष 2003 में हनुमानगढ़ी परिसर में रोजा इफ्तार और नमाज अदा की गई थी। उन्होंने कहा कि इस घटना से जुड़े तथ्यों को झुठलाना इतिहास से इनकार करने जैसा है।

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वाराणसी में जारी वीडियो संदेश में स्वामी जीतेंद्रानंद सरस्वती ने कहा कि तत्कालीन मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव के कार्यकाल में हनुमानगढ़ी के 52 बीघा परिसर स्थित श्रीमहंत ज्ञानदास के आवासीय परिसर में रोजा इफ्तार और नमाज हुई थी। उन्होंने इसे एक सुनियोजित षड्यंत्र बताते हुए कहा कि यदि उस समय संत समाज ने विरोध नहीं किया होता तो आगे चलकर वहां नियमित रूप से नमाज कराने की कोशिश होती। उनका कहना था कि उस दौरान नमाज अदा करने वाले लोग हनुमानजी की सीढ़ियों तक पर बैठ गए थे।

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स्वामी जीतेंद्रानंद ने दावा किया कि हनुमानगढ़ी ट्रस्ट डीड की धारा-10 में स्पष्ट प्रावधान है कि वहां किसी अन्य धर्म या संप्रदाय का प्रचार-प्रसार या उसकी पूजा पद्धति का महिमामंडन नहीं किया जा सकता। इसी आधार पर महंत धर्मदास, गौरीशंकर दास समेत पांच संतों ने तत्कालीन फैजाबाद जिला न्यायालय में याचिका दायर की थी। उनके अनुसार, जिला जज अनिल कुमार शुक्ल ने तत्कालीन महंत ज्ञानदास को लिखित रूप से माफी मांगने और संबंधित संतों की गद्दी पर जाकर क्षमा याचना करने का निर्देश दिया था। स्वामी जीतेंद्रानंद का दावा है कि बाद में महंत ज्ञानदास ने माफी भी मांगी।

उन्होंने यह भी कहा कि हनुमानगढ़ी मंदिर को नवाब शुजाउद्दौला द्वारा बनवाए जाने का दावा भी ऐतिहासिक तथ्यों के विपरीत है। उनके अनुसार, स्कंद पुराण सहित कई प्राचीन ग्रंथों में हनुमानगढ़ी का उल्लेख मिलता है और मंदिर के विस्तार से जुड़े ऐतिहासिक तथ्य भी उपलब्ध हैं।

स्वामी जीतेंद्रानंद ने कहा कि वर्ष 2005 में दोबारा नमाज कराने की कोशिश का नागा संतों ने विरोध किया था और 14 दिनों तक अनशन भी किया। उनका दावा है कि उस समय तत्कालीन सांसद एवं वर्तमान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी आंदोलनरत संतों का समर्थन किया था। उन्होंने कहा कि ऐतिहासिक तथ्यों को झुठलाने से सच्चाई नहीं बदलती।
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