रविदासिया धर्म के अनुयायियों के सबसे बड़े तीर्थ संत रविदास के जन्मस्थान सीर गोवर्धन में बने गुरु मंदिर को स्वर्ण पत्तर से मढ़वाने का संकल्प शुक्रवार को लिया गया। 640वीं जयंती पर यह घोषणा इंग्लैंड के संत रामानंद शहीदी ट्रस्ट के मुख्य न्यासी हरवंश शैकी ने की।
संत रविदास के नाम पर लौटूबीर में अगले वर्ष तक अस्पताल और मेला क्षेत्र में बेगमपुरा शहर की परिकल्पना पर आधारित मल्टीस्टोरी हॉल बनाए जाने का एलान किया गया।
श्रद्धालुओं के जन सैलाब के बीच डेरा सचखंड बल्ल के गद्दीनशीन संत निरंजन दास महाराज ने एकजुटता बनाने और रविदासिया धर्म के प्रचार के साथ ताकत बढ़ाने का आह्वान किया।
संत रविदास की जयंती पर सीर गोवर्धन में श्रद्धालुओं का रेला सड़कों पर निकला तो मंदिर से लेकर लौटूबीर बाबा के मंदिर के सामने बने सत्संग पंडाल तक करीब दो किमी दायरे में ‘लघु भारत’ नजर आने लगा।
देश के कोने-कोने से पहुंचे रविदासियों के बीच सुबह आठ बजे संत निरंजन दास महाराज ने मंदिर परिसर में लगे हरि निशान वाला ध्वज फहरा कर जयंती महोत्सव का शुभारंभ किया। इसी के साथ गुरु रविदास की प्रतिमा के दर्शन के लिए श्रद्धालुओं की लंबी कतार लग गई।
खिलौने, परिधानों, चाट-पकौड़ों, सौंदर्य प्रसाधन की दुकानों पर जहां पंजाबी, राजस्थानी, मराठी महिलाओं, युवतियों, बच्चों और पुरुषों की भीड़ लगी रही तो वहीं सड़कों से लेकर छतों तक लोग का मेले की रंगत निहारने के लिए खड़े रहे।