संत रविदास की जन्मस्थली रैदासियों से गुलजार होने लगी है। रविवार को पंजाब और हरियाणा से सेवादारों के पहुंचने का सिलसिला जा रहा। महिला और पुरुष सेवादारों ने सीर में जयंती समारोह की तैयारियां तेज कर दी हैं।
रविवार को पंजाब और हरियाणा से पहुंचे सेवादार गुरु का जयकारा लगाते गुरु के दरबार में पहुंचे। गुरु दरबार में मत्था टेकने के बाद सेवादार तैयारियों में जुट गए। कोविड-19 को देखते हुए मंदिर प्रबंधन ने रिहायशी पंडाल के पास ही सत्संग पंडाल का निर्माण करने की तैयारी शुरू कर दी है। ट्रस्टी केएल सरोवा ने बताया कि संगत और सेवादारों की संख्या इस बार बेहद कम रहेगी। श्रद्धालुओं की कम संख्या को देखते हुए ही इंतजाम किए जा रहे हैं। सेवादारों की व्यवस्था देखने वाले सोमनाथ ने बताया कि कोरोना के कारण बहुत समस्या आई है, जिसके कारण इस बार संगत भी कम आने की उम्मीद है।
पंजाब से आ रहा है अनाज
जयंती समारोह के दौरान चलने वाले अटूट लंगर के लिए मंदिर की तरफ से रसोई और चूल्हे का काम चल रहा है। पंजाब से लगातार ट्रकों से भरकर अनाज लंगर हाल में आकर रखा जा रहा है। इसके अलावा मंदिर में साफ-सफाई और सजावट काम पूरा हो चुका है।
बहुत कम हैं दुकानें
कोरोना संक्रमण के कारण सीर में बाजार की रौनक फीकी है। मेले का बाजार सूना है। जयंती के 15 दिन पहले ही दूसरे राज्यों से भी दुकानदार यहां दुकान लगाते थे। इस बार जयंती को मात्र पांच दिन शेष हैं, लेकिन मेले के बाजार में रौनक नहीं दिख रही है।