संत रविदास जयन्ती पर वाराणसी के सीरगोवर्धन आए भक्त सोमवार को भारी मन से अपने घरों को रवाना हुए।
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वाराणसी से गुरु चरणों की रज लेकर रैदासी सोमवार की दोपहर पंजाब रवाना हुए। गुरु की जन्मस्थली से रवाना होते हुए श्रद्धालुओं आंखें नम थीं और मन में अगले साल आने का संकल्प। धीरे-धीरे मुख्य पंडाल में ठहरे श्रद्धालुओं के जाने के बाद जगह खाली हो गई। दो दिनों से गुलजार संत के सपनों के नगर बेगमपुरा से लोग घरों को लौटने लगे।
आंखों में संत के सपनों के शहर की झलक लिए श्रद्धालु सुबह से ही रवाना होने लगे। इस दौरान काशी के श्रद्धालुओं में उदासी दिखी, वहीं कुछ बिछोह की बेला में आंसू नहीं रोक पाए। संत शिरोमणि गुरु रविदास की 643वीं जयंती में शामिल होने सीर गोवर्धनपुर पहुंचे डेरा सच्च खंड बल्लां के पीठाधीश्वर संत निरंजन दास सोमवार की दोपहर पंजाब लौट गए।
जाने से पहले मंदिर में संत रविदास के दर्शन किए। इस दौरान सीर गोवर्धनपुर में मौजूद श्रद्धालुओं ने जय गुरुदेव व रविदास शक्ति अमर रहे... के नारे लगाए। गुरु के पांव छूकर आशीर्वाद पाने के लिए भक्तों का तांता लगा रहा। उनके जाने के बाद भक्तों के साथ सेवादार भी लौटने लगे। दूरदराज से आए श्रद्धालु भी घर जाने लगे।
कई दिनों की चहल-पहल के बाद शाम होने तक भीड़ छंटने लगी। लौटते समय मेले में लोगों ने जमकर खरीदारी की। हजार लोगों से भी ज्यादा क्षमता वाले लंगर हाल में भी गिने चुने लोग ही लंगर छकने पहुंचे। सीर गोवर्धन से संत निरंजन दास के साथ सैकड़ों श्रद्धालुओं का जत्था दोपहर एक बजे वाराणसी कैंट रेलवे स्टेशन के लिए रवाना हुआ। मंगलवार तक सभी लोग लौट जाएंगे।
जालंधर लौटा रैदासियों का जत्था
रविदास जयंती का भव्य कार्यक्रम संपन्न होने के बाद सेवादार लौट गए। करीब 1600 से अधिक सेवादारों के जाने के लिए विशेष बेगमपुरा एक्सप्रेस ट्रेन को जालंधर सिटी तक बुक किया गया था। सोमवार दोपहर 3:30 बजे कैंट स्टेशन से रवाना होने वाली ट्रेन में सवार होने के लिए सेवादारों का जत्था दोपहर दो बजे से पहुंचने लगा था।
सेवादारों के अगुवा व डेरा सच्च खंड बल्लां जालंधर के पीठाधीश्वर संत निरंजन दास अनुयायियों के साथ कैंट स्टेशन पहुंचे। वे पंजाब पुलिस की कड़ी सुरक्षा में ट्रेन में सवार हुए। ट्रेन करीब 10 मिनट की देरी से रवाना हुई।