युवा संवाद से कला प्रदर्शनियों तक, होंगे विविध आयोजन
संस्कृति संसद में मुख्य सत्रों के साथ युवा सम्मेलन, संस्कृति उत्सव, चित्रकला प्रदर्शनी, राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय फोटोग्राफी प्रदर्शनी, रंगोली प्रतियोगिता और बच्चों की चित्रकला जैसी गतिविधियां आयोजित की जाएंगी। मुख्य सभागार में सुबह 10 बजे से शाम चार बजे तक संत, विद्वान, वैज्ञानिक और विशेषज्ञ विभिन्न विषयों पर विचार रखेंगे। वहीं, युवा सम्मेलन में नई पीढ़ी को अपने तर्क, अनुभव और सवाल सामने रखने का अवसर मिलेगा।
शाम पांच बजे से रात नौ बजे तक संस्कृति उत्सव आयोजित होगा। इसमें राष्ट्र, धर्म, संस्कृति और संस्कार पर आधारित युवा कलाकारों तथा सांस्कृतिक समूहों की प्रस्तुतियां होंगी। इस तरह आयोजन में वैचारिक चर्चा के साथ भारतीय कला और सांस्कृतिक अभिव्यक्ति को भी स्थान दिया जाएगा।
राम, कृष्ण और शिव की भूमि पर दिखेगी कला की विविधता
संस्कृति संसद के तहत ‘राम, कृष्ण और शिव की पावन भूमि उत्तर प्रदेश : धरोहर, संरक्षण, संवर्धन’ विषय पर अंतरराष्ट्रीय चित्रकला और फोटोग्राफी प्रदर्शनियां लगाई जाएंगी। ये प्रदर्शनियां शिंजो आबे कला दीर्घा में आयोजित होंगी। इसके साथ रंगोली और बाल चित्रकला प्रतियोगिताओं के जरिए अलग-अलग आयु वर्ग के प्रतिभागियों को अपनी रचनात्मकता दिखाने का अवसर मिलेगा।
आयोजन की खास बात यह है कि इसमें संत समाज और पारंपरिक विद्वत संस्थाओं के मार्गदर्शन के साथ युवाओं को स्वतंत्र विचार रखने का मंच दिया जा रहा है। परंपरा, आधुनिकता और बदलते सामाजिक परिवेश के बीच संबंधों पर होने वाला विमर्श संस्कृति को केवल विरासत तक सीमित न रखकर वर्तमान समाज और भविष्य की पीढ़ी से जोड़ने का प्रयास करेगा।
पत्रकार वार्ता में दी गई आयोजन की जानकारी
संस्कृति संसद के संबंध में आयोजित पत्रकार वार्ता में अखिल भारतीय संत समिति एवं गंगा महासभा के राष्ट्रीय महामंत्री स्वामी जीतेंद्रानंद सरस्वती, जगद्गुरु बालक देवाचार्य, श्री काशी विद्वत परिषद के महामंत्री प्रोफेसर राम नारायण द्विवेदी, गंगा महासभा के महामंत्री संगठन गोविंद शर्मा और आयोजन समिति के कार्यकारी अध्यक्ष कैलाश आचार्य उपस्थित रहे। युवा विमर्श के प्रभारी आदेश भट्ट और युवा सम्मेलन के संयोजक नागेंद्र सिंह भी मौजूद रहे। तीन दिनों तक चलने वाला यह आयोजन धार्मिक और विद्वत परंपरा, युवा विचारों तथा कला-संस्कृति को एक साझा मंच पर लाने की पहल है।