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काशी में संस्कृति संसद: तीन हजार संतों के बीच जेन जी के सवालों पर होगा मंथन, 90 फीसदी युवा रखेंगे अपनी बात

Sun, 11 Oct 2026 02:20 PM IST
Aman Vishwakarma अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।

सार

वाराणसी में तीन से पांच नवंबर तक रुद्राक्ष कन्वेंशन सेंटर में छठी संस्कृति संसद आयोजित होगी। इसमें करीब तीन हजार संतों के जुटने की जानकारी दी गई है। युवा सम्मेलन में 90 प्रतिशत युवा वक्ता होंगे। कार्यक्रम में संस्कृति, राष्ट्र, परंपरा और आधुनिकता पर विमर्श के साथ चित्रकला, फोटोग्राफी, रंगोली प्रतियोगिता और सांस्कृतिक प्रस्तुतियां भी होंगी।

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पत्रकारवार्ता को संबोधित करते स्वामी जीतेंद्रानंद सरस्वती। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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भारतीय संस्कृति की परंपराओं और नई पीढ़ी की सोच के बीच संवाद स्थापित करने के उद्देश्य से काशी में तीन दिवसीय संस्कृति संसद का आयोजन होगा। तीन से पांच नवंबर तक रुद्राक्ष अंतरराष्ट्रीय सहयोग एवं कन्वेंशन सेंटर में होने वाली छठी संस्कृति संसद में देशभर से करीब तीन हजार संतों के जुटने की जानकारी दी गई है।

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इस बार आयोजन में परंपरागत विमर्श के साथ युवाओं की भागीदारी पर विशेष जोर रहेगा। युवा सम्मेलन में प्रस्तावित वक्ताओं में 90 प्रतिशत युवा और 10 प्रतिशत विशेषज्ञ होंगे। भाषण, तथ्यपरक प्रस्तुतियों, परिचर्चा और सवाल-जवाब के माध्यम से युवा संस्कृति, राष्ट्र और समकालीन चुनौतियों पर अपनी बात रखेंगे।

गंगा महासभा की ओर से अखिल भारतीय संत समिति, अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद और श्री काशी विद्वत परिषद के मार्गदर्शन में आयोजित इस कार्यक्रम में संतों, विद्वानों, वैज्ञानिकों, विशेषज्ञों, संगठकों, युवाओं और कलाकारों की भागीदारी होगी। आयोजन का उद्देश्य भारतीय ज्ञान परंपरा, सांस्कृतिक-सामाजिक मूल्यों और नई पीढ़ी के साथ उनके संबंधों पर व्यापक विमर्श करना है।

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युवा संवाद से कला प्रदर्शनियों तक, होंगे विविध आयोजन
संस्कृति संसद में मुख्य सत्रों के साथ युवा सम्मेलन, संस्कृति उत्सव, चित्रकला प्रदर्शनी, राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय फोटोग्राफी प्रदर्शनी, रंगोली प्रतियोगिता और बच्चों की चित्रकला जैसी गतिविधियां आयोजित की जाएंगी। मुख्य सभागार में सुबह 10 बजे से शाम चार बजे तक संत, विद्वान, वैज्ञानिक और विशेषज्ञ विभिन्न विषयों पर विचार रखेंगे। वहीं, युवा सम्मेलन में नई पीढ़ी को अपने तर्क, अनुभव और सवाल सामने रखने का अवसर मिलेगा।

शाम पांच बजे से रात नौ बजे तक संस्कृति उत्सव आयोजित होगा। इसमें राष्ट्र, धर्म, संस्कृति और संस्कार पर आधारित युवा कलाकारों तथा सांस्कृतिक समूहों की प्रस्तुतियां होंगी। इस तरह आयोजन में वैचारिक चर्चा के साथ भारतीय कला और सांस्कृतिक अभिव्यक्ति को भी स्थान दिया जाएगा।

राम, कृष्ण और शिव की भूमि पर दिखेगी कला की विविधता
संस्कृति संसद के तहत ‘राम, कृष्ण और शिव की पावन भूमि उत्तर प्रदेश : धरोहर, संरक्षण, संवर्धन’ विषय पर अंतरराष्ट्रीय चित्रकला और फोटोग्राफी प्रदर्शनियां लगाई जाएंगी। ये प्रदर्शनियां शिंजो आबे कला दीर्घा में आयोजित होंगी। इसके साथ रंगोली और बाल चित्रकला प्रतियोगिताओं के जरिए अलग-अलग आयु वर्ग के प्रतिभागियों को अपनी रचनात्मकता दिखाने का अवसर मिलेगा।

आयोजन की खास बात यह है कि इसमें संत समाज और पारंपरिक विद्वत संस्थाओं के मार्गदर्शन के साथ युवाओं को स्वतंत्र विचार रखने का मंच दिया जा रहा है। परंपरा, आधुनिकता और बदलते सामाजिक परिवेश के बीच संबंधों पर होने वाला विमर्श संस्कृति को केवल विरासत तक सीमित न रखकर वर्तमान समाज और भविष्य की पीढ़ी से जोड़ने का प्रयास करेगा।
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पत्रकार वार्ता में दी गई आयोजन की जानकारी
संस्कृति संसद के संबंध में आयोजित पत्रकार वार्ता में अखिल भारतीय संत समिति एवं गंगा महासभा के राष्ट्रीय महामंत्री स्वामी जीतेंद्रानंद सरस्वती, जगद्गुरु बालक देवाचार्य, श्री काशी विद्वत परिषद के महामंत्री प्रोफेसर राम नारायण द्विवेदी, गंगा महासभा के महामंत्री संगठन गोविंद शर्मा और आयोजन समिति के कार्यकारी अध्यक्ष कैलाश आचार्य उपस्थित रहे। युवा विमर्श के प्रभारी आदेश भट्ट और युवा सम्मेलन के संयोजक नागेंद्र सिंह भी मौजूद रहे। तीन दिनों तक चलने वाला यह आयोजन धार्मिक और विद्वत परंपरा, युवा विचारों तथा कला-संस्कृति को एक साझा मंच पर लाने की पहल है।
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