रुद्राक्ष कन्वेंशन सेंटर में होगा मंथन।
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काशी में दो से पांच नवंबर तक सिगरा स्थित रुद्राक्ष कन्वेंशन सेंटर में आयोजित होने वाले संस्कृति संसद को इस बार ऐतिहासिक बनाने की तैयारी है। इसमें देशभर से लगभग 3000 साधु-संत, महंत और महामंडलेश्वर शामिल होंगे। संसद में सनातन धर्म और संस्कृति के संरक्षण व संवर्धन के साथ-साथ पीओके और बलूचिस्तान से जुड़े मुद्दों पर भी मंथन किया जाएगा। आयोजन में हिंदू बलूच प्रतिनिधियों के भी शामिल होने की संभावना है। उत्तर प्रदेश के एक हजार मंदिरों के महंत और पुजारियों के अलावा भारतीय संस्कृति से जुड़े विद्वान और वक्ता विदेशों से भी भाग लेंगे।
अखिल भारतीय संत समिति, अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद, श्रीकाशी विद्वत परिषद और गंगा महासभा की ओर से आयोजित संस्कृति संसद का शुभारंभ दो नवंबर को होगा। देशभर से आए साधु-संत श्रीकाशी विश्वनाथ मंदिर में राष्ट्र की एकता और अखंडता के लिए रुद्राभिषेक करेंगे।
अखिल भारतीय संत समिति के राष्ट्रीय महामंत्री जितेंद्रानंद सरस्वती ने बताया कि हर दो वर्ष पर आयोजित होने वाली संस्कृति संसद में इस बार सनातन धर्म और संस्कृति के संरक्षण के साथ पीओके और बलूचिस्तान के मुद्दों पर भी चर्चा की जाएगी। उन्होंने कहा कि बलूचिस्तान से कुछ प्रतिनिधि भी इसमें भाग लेंगे। संसद में सनातन उन्मूलन की चुनौतियों और हिंदू धर्म के विरुद्ध कथित राजनीतिक एवं धार्मिक षड्यंत्रों पर भी विचार-विमर्श होगा।
उन्होंने बताया कि देश के 400 से अधिक जिलों और 127 संप्रदायों के साधु-संत इसमें शामिल होंगे। दो सौ से अधिक महामंडलेश्वर भी संस्कृति संसद में भाग लेंगे। साधु-संत श्रीकाशी विश्वनाथ मंदिर में रुद्राभिषेक कर अयोध्या में बलिदान हुए ज्ञात-अज्ञात लोगों की आत्मा की शांति तथा राष्ट्र की एकता और अखंडता बनाए रखने की कामना करें।