संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय से संबद्ध संस्कृत महाविद्यालय अब अपनी भूमि, भवन और संपत्ति को बेच नहीं सकेंगे। अगर किसी ने ऐसा किया भी तो उसके विक्रय की प्रक्रिया शून्य हो जाएगी। विश्वविद्यालय ने महाविद्यालयों के सरंक्षण के लिए निर्णय लिया है।
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कुलसचिव राकेश कुमार ने आशय का आदेश भी जारी कर दिया है। कुलसचिव ने बताया कि कुलपति प्रो. बिहारी लाल शर्मा की अनुमति के बाद महाविद्यालय के हितों की रक्षा के लिए निर्णय लिया गया है। इसमें विवि से संबद्ध संस्कृत महाविद्यालयों की भूमि, भवन और अन्य संपत्तियों के विक्रय पर प्रतिबंध लगाया गया है।
कुलसचिव ने बताया कि विश्वविद्यालय ने यह निर्णय इसलिए लिया है क्योंकि कुछ महाविद्यालयों के प्रबंध तंत्र की ओर से महाविद्यालयों की भूमि, भवन और अन्य संपत्तियों को बेचने का प्रयास किया जा रहा था। विश्वविद्यालय ने यह निर्णय लिया है ताकि महाविद्यालयों की संपत्तियों का संरक्षण और संवर्धन किया जा सके।