श्री संकटमोचन संगीत समारोह में रविवार को दूसरे दिन भक्तों की भारी भीड़ जुटी। शिवमणि के ड्रम प्रस्तुति से पूरा परिसर झूम उठा। तालियों की गड़गड़ाहट से पूरा मंदिर परिसर गूंजता रहा।
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शिवमणि ने दी ड्रम की शानदार प्रस्तुति
- फोटो : रोहित सोनकर
रविवार की शाम को शिवमणि की टीम छह बजे के पहले ही मंदिर पहुंच चुकी थी। दो घंटे की मेहनत के बाद म्यूजिक का सेटअप तैयार हुआ तो रात आठ बजे दूसरी निशा की शुरुआत हुई। 33 माइक और दो मिक्सर के सहयोग से शिवमणि का जादू घंटे भर तक श्रोताओं के सिर चढ़कर बोलता रहा। शिवमणि ने शंखनाद से शुरुआत की।
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संकटमोचन संगीत समारोह
- फोटो : रोहित सोनकर
कभी मंत्रों की गूंज तो कभी स्तोत्र, कभी हर-हर महादेव... तो कभी हर-हर बम-बम...। ड्रम, मैंडोलिन और कीबोर्ड से निकलने वाली सुरलहरियों का जादू हर किसी के सिर चढ़कर बोल रहा था। इस बीच कभी घुंघरुओं की झंकार मुखर हो रही थी तो तबले पर ताल।
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संकटमोचन संगीत समारोह
- फोटो : अमर उजाला
पानी से भरी बाल्टी में कभी घुंघरू बज रहे थे तो कभी पेड़ की छालों के गुच्छों को पानी में डुबोकर शिवमणि ने सुर निकाले। परक्यूशन से निकल रही झंकार भी मोहक थी। इसके बाद ऐ गिरी नंदिनी...के बाद समापन रघुपति राघव राजा राम...से हुआ।
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संकटमोचन संगीत समारोह
- फोटो : रोहित सोनकर
शिवमणि के माता-पिता भी इस दरबार में उपस्थित रहे। अंत में सभी कलाकारों ने मिलकर महंत प्रो. विश्वंभर नाथ मिश्र को अंगवस्त्रम और दक्षिण भारत की विशेष माला भेंट कर अभिनंदन किया।
महंत प्रो. मिश्र ने कहा कि पता नहीं इस बार क्या बात है कि जो भी इस दरबार में प्रस्तुति दे रहा है बजरंग बली उसे अमेरिका भेज दे रहे हैं। यह इस दरबार की खासियत है कि यहां सभी लोग एक परिवार के रूप में उपस्थित रहते हैं।