भक्तों का रहा जमावड़ा।
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कुंती जी ने प्रभु से दुःख की कामना की है, क्योंकि दुःख जब आता है, वह प्रभु की याद दिलाता है।
सुख में मानव प्रभु को सहज ही भूल जाता है। कुंती जी को दुःख से प्रेम नही था, किंतु दुःख में प्रभु का नाम जिव्हा पर आता है।