प्रभाती रागों पर सुरों की अलापचारी के साथ संकट मोचन के दरबार में सुबह की लालिमा फूटी। सुर-लय की साधना शुद्धता के ऊंचे मानकों से होकर गुजरी तो देश-दुनिया से आए संगीत प्रेमी निहाल हो उठे। मौका था पद्मभूषण पं. राजन मिश्र और पं. साजन मिश्र के ख्याल गायन पर मीड़ और गमक के अनूठे प्रयोगों का।
इसी के साथ संकट मोचन संगीत समारोह की छठी और आखिरी निशा श्रोताओं के मानस पटल पर अंकित हो गई। संकट मोचन की आरती के बाद मंच पर पहुंचे पं. राजन-साजन मिश्र ने राग बैरागी भैरव की अवतारणा की।
प्रभाती राग पर सुरों की बेजोड़ अलापचारी पर पक्षियों ने चहचहाना शुरू कर दिया। पूरब में लाली चटख होने लगी। एकताल के बाद तीन ताल में बंदिशों पर स्वरों के प्रयोग से संकट मोचन के दरबार में सुबह की हवा को सुरों से सुवासित कर दिया।
इसके बाद राम के भजन से उन्होंने विदा ली। तबले पर अनिंदो चटर्जी और हारमोनियम पर पं. धर्मनाथ मिश्र ने संगत की। इनसे पहले पद्मश्री डॉ. येल्ला वैंकटेश्वर राव ने मृदंगम पर ताल वर्षा की।
मृदंगम के बेजोड़ साधक ने आदिताल में परन, टुकड़ों के साथ रेला के अलावा पुरानी बंदिशों पर ताल लगाए। संचालन किया पं. हरिराम द्विवेदी और प्रतिमा सिन्हा ने। संकट मोचन के महंत प्रो. विश्वंभर नाथ मिश्र ने कलाकारों को सम्मानित किया।