बगीचे में सजी कला दीर्घा
संकट मोचन मंदिर परिसर में बगीचे की ओर चित्रों की एक कला दीर्घा सजकर तैयार है। यहां पर 100 चित्रों को लगाया जाना है। कई कलाकार लाइव पेंटिंग भी करेंगे। साथ ही मूर्तिकला एग्जीबिशन और कला प्रतियोगिता भी कराई जाएगी। पेड़ पर बैठे राम-सीता कटआउट बनाने काम चल रहा था।
गोस्वामी तुलसीदास ने मंदिर में पहली बार हनुमान जी की जिस मूर्ति के दर्शन किए थे, उसकी भी झांकी सज रही थी। प्रदर्शनी में कोलकाता, झारखंड, महाराष्ट्र, पंजाब, ओडिशा आदि राज्यों के साथ ही फ्रांस, स्पेन, नेपाल, इटली, कोरिया आदि देशों के 20 से से ज्यादा कलाकार भी आएंगे।
चित्र प्रदर्शनी की तैयारी करते कर्मचारी।
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भक्तों के दुख व संकट को दूर करते हैं संकटमोचन
वाराणसी। श्री संकट मोचन हनुमान प्राकट्योत्सव पर चल रहे सार्वभौम रामायण सम्मेलन में विभिन्न प्रांतों से आए मानस मर्मज्ञों ने हनुमत प्रभु का महिमागान किया। किशनगंज से आए पं. किशन उपाध्याय ने हनुमान जी के उदार चरित्र का वर्णन करते हुए कहा कि संकट मोचन हर समय भक्तों के दुख और संकट को दूर करने के लिए ही विराजमान रहते हैं।
पं. सुरेश मिश्र ने कहा कि रामचरितमानस ज्ञान का भंडार है। इसमें सुंदरकांड का पाठ करने मात्र से तत्काल फल मिलता है। भभुआ के डॉ. चंद्रकांत चतुर्वेदी, डॉ. परमेश्वर दत्त शुक्ल, डॉ. उमाशंकर शर्मा, पं. श्याम सुंदर पांडेय, पं. रामदीन उपाध्याय, पं. रामकृष्ण त्रिपाठी, पं. गंगा सागर पांडेय, पं. धर्म प्रकाश मिश्र ने भी मानस के विभिन्न प्रसंगों का वर्णन किया। इस दाैरान महंत प्रो. विश्वंभरनाथ मिश्र, डॉ. जयप्रकाश मिश्र, विश्वनाथ यादव, विजय बहादुर सिंह, संदीप पांडेय आदि रहे।