भरतनाट्यम प्रस्तुत करतीं रमा वैधनाथन
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संकटमोचन संगीत समारोह की नादयात्रा का प्रवाह चौथी निशा से जुड़कर आगे बढ़ा। नादब्रह्म की उपासना के महोत्सव में कलाकारों ने अपनी प्रस्तुतियों से श्रोताओं को आनंदित किया। बजरंगबली के दरबार में गायन, वादन और नृत्य के माध्यम से कलाकारों ने हाजिरी लगाई। भरतनाट्यम से हुआ श्रीगणेश मध्यरात्रि में सितार वादन तक पहुंचा। गुरुवार को शताब्दी वर्ष के आयोजन की चौथी निशा की शुरुआत दिल्ली से आईं रमा वैद्यनाथन ने गणपति की आराधना वक्रतुंड महाकाय सूर्यकोटिसमप्रभ:, निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्व कार्येषु सर्वदा...पर नृत्य से की। भरतनाट्यम की लयकारियों से हनुमत दरबार में श्रद्धा के पुष्प अर्पित किए।
तत्कार की संवादिनी पर रमा ने सुधा गीतों के साथ कदमों के सुंदर संयोजन से भावों की माला को विस्तार दिया। इसके बाद भजमन रामचरण सुखदाई, जिन चरणन से निकली सुरसरि शंकर जटा समाई... पर भरतनाट्यम की भक्तिपूर्ण भंगिमाओं ने दर्शकों को हनुमान भक्ति का साक्षात अहसास कराया।
दूसरी प्रस्तुति लेकर मंच पर एनआरआई ठाकुर चक्रपाणि सिंह पहुंचे। कच्छपी वीणा पर उन्होंने राग किरवानी की अवतारणा की। आलाप से उन्होंने आरंभ किया। आलापचारी और रागदारी की बानगी पेश करते हुए जोड़ और झाला के जरिए उन्होंने संगीत की साधना को मंच पर साकार किया। तबले पर पं. समर साहा ने संगत की। तीसरी प्रस्तुति में पुणे के पं. अजय पोहनकर ने मंच संभाला। सात सुरों के आलाप से उन्होंने महाबली को नमन किया। बनारसी ठुमरी के जरिये उन्होंने बनारसी श्रोताओं को अप्पाजी की याद दिलाई। ठुमरी की बंदिशों के बाद राम-नाम की धुन के साथ ही उन्होंने शृंखला को आगे बढ़ाया।