संकटमोचन संगीत समारोह की तीसरी निशा पद्मभूषण पं. राजन मिश्र को समर्पित रही। पं. राजन मिश्र को नमन करते हुए उनके पिछले साल की प्रस्तुतियों से कार्यक्रम का शुभारंभ हुआ तो दर्शकों की भी आंखें छलक आईं। संकटमोचन संगीत समारोह के पेज पर आंसुओं से भरी इमोजी पोस्ट करके दर्शकों ने श्रद्धा सुमन अर्पित किए।
सोमवार को संगीत समारोह की शुरुआत में पद्मभूषण पं. राजन मिश्र की पिछली साल की प्रस्तुति के जरिये कार्यक्रम का एक अंश उनको समर्पित किया गया। गत वर्ष डिजिटल माध्यम से संकट मोचन दरबार में दिल्ली से लगाई गई उनकी हाजिरी के उस अंश से हुआ जिसमें वह अपने छोटे भाई पं. साजन मिश्र, पुत्रों रीतेश और रजनीश के साथ बैठे हुए गाते नजर आए। जिनके हृदय राम विराजे...भजन के कुछ अंश की प्रस्तुति के साथ संगीत की रसधारा का प्रवाह आरंभ हुआ। कुछ ही मिनटों की इस प्रस्तुति के दौरान पं. राजन मिश्र के प्रशंसकों को पुराने दिनों की यादें ताजा होती चली गईं।
अगली कड़ी में पद्मविभूषण पं. छन्नूलाल मिश्र के शिष्य भगीरथ जालान का गायन हुआ। उन्होंने राग यमन में निबद्ध बंदिश दर्शन बिनु नयना तरसे...से की। इसके उपरांत राग यमन में ही तराना छेड़ा। अपने गुरु के प्रिय दादरा तोरे नैना की लागी कटार सजनी... से शृंगार रस से सिक्त किया। अपने गुरु की ही बंदिश न जाओ जी मोसे बतिया बनाय... की प्रस्तुति के बाद उन्होंने गायन का समापन गोस्वामी तुलसी दास कृत विनय पत्रिका के पद से किया।
तीसरी निशा की तीसरी प्रस्तुति लेकर विशाल कृष्णा वाराणसी से लाइव हुए। नृत्य साम्राज्ञी सितारा देवी से विरासत में कथक की परंपरा का सजीव प्रदर्शन किया। विशाल कृष्ण ने शिव वंदना पर नृत्य से शुरूआत की। इसके उपरांत उन्होंने तीन ताल में पारंपरिक कथक की प्रस्तुति दी। इस दौरान उन्होंने अपने पिता पं. मोहनकृष्ण मिश्र के मार्गदर्शन में सीखी गई तिहाईयों, टुकड़ों और परन के माध्यम से आभासी दुनिया के मंच पर दर्शकों का प्यार व तालियां भी बटोरीं।
चौथी प्रस्तुति नई दिल्ली से ऑनलाइन हुए युवा सितारवादक मेहताब अली नियाजी की रही। भिंडीबाजार मुरादाबाद घराने के ख्यात उस्ताद मोहसीन अली नेयाजी के पुत्र एवं शिष्य मेहताब ने अपना वादन पं. राजन मिश्र को समर्पित किया। उन्होंने राग मालकौंस में आलाप, जोड़ झाला की प्रस्तुति दी। उनके साथ तबले पर उनके अनुज खुर्रम अली नियाजी ने कुशल संगत की। निशा की पांचवीं प्रस्तुति पं. जसराज के शिष्य हेमांग मेहता के गायन रही। गायकी का आरंभ राग जोग में राम भजन राम को सुमिरन कर ले मेरे मन... के गायन से किया।
इसके पूर्व रविवार को दूसरी निशा में चौथी प्रस्तुति ग्वालिर घराने की प्रतिनिधि कलाकार मंजूषा पाटिल की रही। मंजूषा ने मुंबई से हाजिरी लगाई। उन्होंने राग पूरिया में एकताल एवं दु्रत तीनताल की रचना सुनाई। मंजूषा ने भजन पायो जी मैंने राम रतन धन पायो...गाकर प्रस्तुति का समापन किया। अंतिम प्रस्तुति पद्मविभूषण पं. जसराज की शिष्या पारोमिता देशमुख की रही। वह मुंबई से संकटमोचन के पेज पर जुड़ीं। उन्होंने हनुमान जी के हृदयस्पशी भजन, आरती से संकटमोचन को नमन किया। अंत में राग भैरवी में निबद्ध रचना गुरु चरणन में निसदिन रहिए...गाकर कार्यक्रम को विराम दिया।