पांचवीं प्रस्तुति में चेन्नई की दीपिका वरदराजन ने अपने सुरीले कंठ से रघुकुल में प्रगटे रघुबीर और हनुमान लला तुम प्यारे लला और राम-राम जय राजा राम गाकर हनुमान जी की आराधना की। राग बागेश्री में तीन बंदिशें एक ताल, तीन ताल और द्रुत एक ताल में गाकर श्रोताओं को अपना मुरीद बना दिया। उद्धव ने तबले पर और मोहित साहनी ने संवादिनी पर संगत की।
गया के राजेंद्र सेजवार ने राग नटभैरव में ख्याल और ठुमरी गायन से श्रोताओं को भोर का एहसास कराया। पं. कुबेरनाथ मिश्र ने तबले पर, संवादिनी पर पं. धर्मनाथ मिश्र और सारंगी पर संदीप मिश्र ने संगत किया। अंत में दिल्ली के पं. हरीश तिवारी ने राग भटियार में ख्याल गायकी और भजन गाकर अपने गायन को विराम दिया। तबले पर पं. मिथिवलेश झा और संवादिनी पर पं. विनय मिश्र ने संगत की।