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संतूर पर रागदारी से बदली फिजा

Wed, 19 Apr 2017 01:48 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, वाराणसी
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संकट मोचन संगीत समारोह - फोटो : self
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संकट मोचन मंदिर परिसर में गायन, वादन और नृत्य की त्रिवेणी तमाम दिलों की थकान और रगों की पीड़ा बहा दे रही है। मंगलवार की रात रागों, बंदिशों पर जाने-माने महारथियों की अलापचारी हुई। कश्मीरी लोक वाद्य संतूर को शास्त्र में उतारने वाले विख्यात कलाकार पद्मविभूषण पं. शिवकुमार शर्मा ने संतूर के तारों पर रागदारी और स्वरों के समन्वय से महोत्सव को नई ऊंचाई प्रदान की। संकट मोचन संगीत समारोह चौथी निशा के राग-रंग कुछ इसी अंदाज में जीवंत हुए।
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फूलों से सुसज्जित भव्य मंच पर शुरुआत हुई दक्षिण की कर्नाटक शैली के गायक वाई बाल मुरली की अलापचारी से। उन्होंने कर्नाटक शैली में शिव आराधना के बाद कई बंदिशों को सुरों से सजाया। उनके साथ मृदंगम पर एसबी प्रसाद और वायलिन पं. सुखदेव मिश्र ने संगत की। इसके बाद मंच संभाला पं. शिव कुमार शर्मा ने। उनके आते ही संकट मोचन के मुक्तांगन में ठसाठस भरी दर्शक दीर्घा में हर-हर महादेव के जयकारे गूंजने लगे। पं. शिवकुमार ने राग बागेश्री की अवतारणा की। तबले के साथ नोकझोंक और संवाद भी मोहक रहे।


तबले पर पं. रामकुमार मिश्र और पखावज पर पं. भवानी शंकर ने बेजोड़ संगत की। इसके बाद ओडिसी नृत्यांगना पद्मभूषण सोनल मानसिंह मंच पर आईं तो जरूर लेकिन उन्होंने नृत्य किए बिना ही मंच छोड़ दिया। इसके बाद प्रख्यात गायक हरिहरन ने मंच संभाला। राग आभोगी में निबद्ध विलंबित एक ताल की बंदिश की अवतारणा की। बंदिश के बोल थे ‘मूरख काहे करत गुमान’। तबले पर शादाब भारती, गिटार पर संजय दास, सारंगी पर दिलशाद खान ने संगत की। इस दौरान बड़ी तादाद में संगीत प्रेमी संकट मोचन परिसर में मौजूद थे। 
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