राजनीतिक दृष्टि से यह समय बेहद महत्वपूर्ण है। इसी अवधि में पंजाब विधानसभा चुनाव की तैयारियां तेज होंगी, जबकि उत्तर प्रदेश में भी 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक दल अपनी सामाजिक जमीन मजबूत करने में जुटेंगे। ऐसे में काशी से शुरू हुआ यह अभियान भाजपा की दलित आउटरीच रणनीति का स्पष्ट संकेत माना जा रहा है।भाजपा लंबे समय से डॉ. भीमराव अंबेडकर, संत रविदास, महर्षि वाल्मीकि और अन्य दलित संतों-महापुरुषों की विरासत को अपने राजनीतिक विमर्श का हिस्सा बना रही है।
मंच से लगभग हर प्रमुख वक्ता ने संत रविदास के समता, सामाजिक न्याय और जाति-विहीन समाज के संदेश को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की योजनाओं और भाजपा सरकार की नीतियों से जोड़ने की कोशिश की। भाजपा ने अभियान की अवधि, कार्यक्रमों की संरचना और भौगोलिक विस्तार को पूरी तरह चुनावी कैलेंडर के अनुरूप रखा है।
कलश यात्रा, संत संपर्क अभियान, समरसता यात्रा, छात्रावास संपर्क और बूथ स्तर तक पहुंचने की योजना इस बात का संकेत देती है।पंजाब भाजपा के लिए विशेष महत्व रखता है क्योंकि राज्य में रविदासिया समाज का व्यापक सामाजिक और राजनीतिक प्रभाव है। दोआबा क्षेत्र के कई विधानसभा क्षेत्रों में यह समुदाय निर्णायक भूमिका निभाता है।
काशी के सीर गोवर्धन स्थित संत रविदास जन्मस्थली का धार्मिक और भावनात्मक संबंध पंजाब के लाखों अनुयायियों से जुड़ा है। ऐसे में काशी से अभियान की शुरुआत कर भाजपा ने उत्तर प्रदेश और पंजाब के बीच एक साझा सामाजिक-राजनीतिक संदेश देने का प्रयास किया है।