पाकिस्तान के साथ इन टॉपिक पर हुए रिसर्च
- कार्बनिक अपशिष्ट जल को निकालने के लिए फोटोकैटलिस्ट के रूप में जिंक ऑक्साइड नैनोकणों पर कॉपर डोपिंग का प्रभाव।
- नाक के माध्यम से दवा शरीर में पहुंचाने की क्षमता के लिए मोमेटासोन फ्यूरोएट से भरे मेसोपोरस नैनोकणों का डिजाइन।
पाकिस्तान के लाहौर, मुल्तान और फैसलाबाद के संस्थान
फैसलाबाद के रिपाह इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी, लाहौर की राशिद लतीफ खान यूनिवर्सिटी, पाकिस्तान स्थित खैबर पख्तूनवा की हजारा यूनिवर्सिटी और पीओके स्थित यूनिवर्सिटी ऑफ आजाद कश्मीर और पाकिस्तान के मुल्तान स्थित बहुआद्दीन जकारिया यूनिवर्सिटी।
पाकिस्तान से प्रोफेसर को फोन करके मांगा था मालवीय बीज
तीन साल पहले एक पाकिस्तानी नागरिक ने धान के मालवीय बीज के लिए बीएचयू के कृषि वैज्ञानिक प्रो. एसके सिंह से संपर्क किया था। प्रोफेसर ने उसे बीज देने से इन्कार कर दिया था। वहां की पाकिस्तान की ईरी से संपर्क करने को कहा गया था। बार-बार फोन और व्हाट्सएप पर मेसेज करता रहा लेकिन प्रोफेसर ने कोई जवाब नहीं दिया।
इसे भी पढ़ें; सावन का पहला दिन: सीएम योगी ने बाबा विश्वनाथ का किया जलाभिषेक, काल भैरव के किए दर्शन-पूजन
इस साल बीएचयू के 10 रिसर्च पेपर बाहर, बिना बताए अमेरिकी वैज्ञानिक को शामिल किया
साल 2026 में बीएचयू और आईआईटी को मिलाकर कुल 10 रिसर्च पेपर को अंतरराष्ट्रीय जर्नल ने बाहर किए गए हैं। इनमें आईआईटी बीएचयू, आईएमएस बीएचयू के 3-3 और बीएचयू के चार रिसर्च पेपर शामिल हैं। इसमें एक रिसर्च पेपर में किसी अमेरिकी वैज्ञानिक को बिना उसकी सहमति से शामिल कर लिया गया था। वैज्ञानिक की शिकायत पर रिसर्च पेपर हटाया गया। वहीं एक रिसर्च पेपर एमडी करने वाले चार रेजीडेंट्स ने बिना किसी कंसल्टेंट या प्रोफेसर के ही छाप लिया था।